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    हिमाचल: क्या कांग्रेस के 6 विधायकों की जाएगी सदस्यता? सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच करेगी CPS मामले में सुनवाई

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Wed, 21 Jan 2026 01:39 PM (IST)

    हिमाचल प्रदेश में छह पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) की विधानसभा सदस्यता पर सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की बेंच सुनवाई करेगी। मुख्य न्यायाधीश ...और पढ़ें

    छह पूर्व सीपीएस की विधानसभा सदस्यता पर अब सुप्रीम कोर्ट की बेंच सुनवाई करेगी।

    छह पूर्व सीपीएस की विधानसभा सदस्यता पर अब सुप्रीम कोर्ट की बेंच सुनवाई करेगी।

    HighLights

    1. छह पूर्व सीपीएस की सदस्यता पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई।

    2. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच।

    3. हिमाचल हाई कोर्ट के फैसले को राज्य सरकार ने चुनौती दी।

    जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर सियासी ड्रामा देखने को मिल सकता है। छह पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) की विधानसभा सदस्यता पर अब सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई। इस बेंच में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्त व न्यायमूर्ति जायमाला बागची शामिल थे।

    हाई कोर्ट ने दिए थे सीपीएस पद से हटाने के आदेश

    हिमाचल सरकार ने हाई कोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। प्रदेश हाई कोर्ट ने वर्ष 2024 में कल्पना देवी व भाजपा विधायकों की याचिका पर निर्णय सुनाया था। हाई कोर्ट ने सीपीएस किशोरी लाल, सुंदर सिंह ठाकुर, मोहन लाल ब्राक्टा, राम कुमार चौधरी, आशीष बुटेल व संजय अवस्थी को उनके पद से हटाने के आदेश दिए थे।

    16 मार्च को होगी सुनवाई

    भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती की ओर से उनके अधिवक्ता ने मामले पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया, जिस पर मुख्य न्यायाधीश वाली बेंच ने सुनवाई के लिए तीन जजों की बेंच गठित करने की बात कही। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की गई है।

    हिमाचल में यह है स्थिति

    हिमाचल प्रदेश सरकार में कांग्रेस के 40 विधायक हैं, यदि छह की सदस्यता चली जाती है तो सरकार के पास 34 सदस्य बचेंगे। वहीं भाजपा के 28 विधायक हैं। ऐसे में भाजपा तोड़जोड़ की कोशिश भी कर सकती है। हालांकि यदि छह विधायकों की सदस्यता चली जाती है, तब भी सरकार बहुमत में रहेगी। 

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    68 की विधानसभा में फिर 62 सदस्य बचेंगे। ऐसे में बहुमत के लिए 32 विधायकों की जरूरत होगी, जबकि सरकार के पास 34 सदस्य होंगे। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिक गई हैं। 

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