Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    हिमाचल में बैंक खाते किराये पर लेकर करोड़ों रुपये हो रहे इधर से उधर, साइबर ठगी पर पुलिस ने जारी की एडवायजरी

    By Chaitanya ThakurEdited By: Rajesh Sharma
    Updated: Mon, 13 Jul 2026 12:51 PM (IST)

    हिमाचल में साइबर ठगों का एक नया नेटवर्क सामने आया है, जो किराए पर बैंक खाते लेकर करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी कर रहा है। जांच एजेंसियां संदिग्ध खातों क ...और पढ़ें

    हिमाचल में साइबर ठगों ने फ्रॉड का नया तरीका निकाला है। प्रतीकात्म्क फोटो

    हिमाचल में साइबर ठगों ने फ्रॉड का नया तरीका निकाला है। प्रतीकात्म्क फोटो

    HighLights

    1. साइबर ठग किराए पर बैंक खाते इस्तेमाल कर रहे।

    2. तीन साल में 590 मामले, 160 करोड़ से अधिक की ठगी।

    3. पुलिस ने 146 साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए।

    चैतन्य ठाकुर, शिमला। हिमाचल में साइबर ठगों का एक नया और संगठित नेटवर्क जांच एजेंसियों के निशाने पर है। सामने आया है कि साइबर अपराधी बैंक खातों को किराये पर लेकर उन्हें 'म्यूल अकाउंट' के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हीं खातों से आनलाइन ठगी से हासिल करोड़ों रुपये कुछ ही मिनटों में एक से दूसरे खाते में पहुंचाकर उसका स्रोत छिपा दिया जाता है।

    संदिग्ध खाते निशाने पर

    इस नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से मिल रहे इनपुट के आधार पर साइबर सैल और बैंक संयुक्त अभियान चला रहे हैं। संदिग्ध बैंक खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज किया जा रहा है, जबकि संदिग्ध लेनदेन, केवाईसी प्रक्रिया और बैंक कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    कमीशन का लालच देकर चल रहा खेल

    जांच एजेंसियों के अनुसार साइबर गिरोह बेरोजगार, अशिक्षित और ग्रामीण युवाओं को आसान कमाई, नौकरी या कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी हासिल कर लेते हैं। 

    इसके बाद ठगी की रकम सबसे पहले इन्हीं खातों में भेजी जाती है और फिर उसे कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है या नकद निकाल लिया जाता है। इस प्रक्रिया से असली साइबर अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।

    खबरें और भी

    क्राइम-एज-ए-सर्विस माडल

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इस नेटवर्क को क्राइम-एज-ए-सर्विस माडल का हिस्सा मानते हैं, जिसमें कई लोग अलग-अलग भूमिका निभाकर साइबर अपराध को अंजाम देते हैं।

    पुलिस की एडवायजरी

    साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए सरकार ने 146 पुलिस थानों में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं। स्कूलों, कालेजों और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग ओटीपी, यूपीआइ फ्राड, निवेश घोटालों, डिजिटल अरेस्ट और अन्य आनलाइन ठगी के तरीकों से सतर्क रहें। पुलिस का मानना है कि दर्ज हुए 590 मामले वास्तविक घटनाओं का केवल एक हिस्सा हैं। बड़ी संख्या में लोग साइबर ठगी का शिकार होने के बावजूद शिकायत दर्ज नहीं करवाते।

    तीन वर्ष में साइबर ठगी के 590 मामले दर्ज, सोलन में सबसे अधिक 

    आंकड़ों के अनुसार हिमाचल में तीन वर्ष में साइबर ठगी के करीब 590 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें लोगों से 160 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी हुई है। 258 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। कुछ मामलों में बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत या लापरवाही सामने आने पर चार बैंक कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया है। प्रदेश में सबसे अधिक 101 मामले सोलन जिले में दर्ज हुए हैं। इसके बाद कांगड़ा में 68, मंडी में 32, किन्नौर में 28, सिरमौर में 27, शिमला में 19, ऊना में 14, नूरपुर पुलिस जिला में 12, चंबा और कुल्लू में 11-11, हमीरपुर में सात, लाहुल स्पीति में चार तथा बिलासपुर में एक मामला दर्ज किया गया।

    यह भी पढ़ें: हिमाचल में गजब शादी: सुबह सात फेरे लिए और शाम को रिश्ता खत्म, ऐसा क्या हुआ कि दुल्हन ने ससुराल जाने से कर दिया मना?