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    हिमाचल के सरकारी स्कूल का शिक्षक नौकरी से बर्खास्त, तीन छात्राओं का किया था शारीरिक शोषण

    By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Tue, 17 Mar 2026 04:16 PM (IST)

    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में एक सरकारी स्कूल के इतिहास प्रवक्ता विपिन कुमार को तीन नाबालिग छात्राओं के शारीरिक शोषण, घर बुलाकर काम करवाने और जातीय ...और पढ़ें

    हिमाचल शिक्षा विभाग ने शिक्षक को बर्खास्त किया है। प्रतीकात्मक फोटो

    हिमाचल शिक्षा विभाग ने शिक्षक को बर्खास्त किया है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. शिक्षक विपिन कुमार को छात्राओं के शोषण पर नौकरी से बर्खास्त।

    2. तीन नाबालिग छात्राओं का शारीरिक शोषण और जातीय भेदभाव का आरोप।

    3. कुल्लू जिले के सरकारी स्कूल में हुई घटना, विभाग ने की कार्रवाई।

    राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूल में तीन नाबालिग छात्राओं के साथ शारीरिक शोषण, घर बुलाकर काम करवाना, जातीय भेदभाव मामले के आरोपित शिक्षक को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। आरोपित शिक्षक विपिन कुमार इतिहास विषय के प्रवक्ता था। कुल्लू जिला के एक स्कूल में वह अनुबंध आधार पर नियुक्त थे।

    उप निदेशक उच्च शिक्षा कुल्लू की जांच रिपोर्ट के आधार पर निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग आशीष कोहली की ओर से यह कार्रवाई की गई है। 

    निजी आवास पर बुलाकर की थी छेड़छाड़

    रिपोर्ट के अनुसार 19 फरवरी 2026 को आरोपित शिक्षक ने स्कूल की तीन नाबालिग छात्राओं को स्कूल समय के दौरान अपने निजी आवास पर घरेलू कार्य करवाने के लिए बुलाया। इस दौरान एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ की गई। शिक्षक ने छात्रा को धमकाते हुए उसे चुप रहने व यह बात किसी को न बताने को कहा गया। 

    छात्रा शिक्षक के खिलाफ पहुंची थी थाने

    छात्रा ने साहस दिखाते हुए कुल्लू जिला के सैंज थाने में आरोपित शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पाक्सो एक्ट 2012 की धारा 10 के तहत एफआइआर दर्ज की। 

    जतीय भेदभाव का भी आरोप

    स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस को लेकर विभागीय जांच बिठाई। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित ने अनुसूचित जाति (एससी) से संबंध रखने वाली छात्रा को विशेष रूप से घरेलू कार्य के लिए निशाना बनाया। इसे जातीय भेदभाव का गंभीर मामला मानते हुए अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का उल्लंघन बताया गया है।

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    निदेशक ने किया आगाह

    स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। विभाग की यौन उत्पीड़न और जातीय भेदभाव के खिलाफ शून्य सहनशीलता नीति है। आरोपी का आचरण न केवल बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि पूरे शिक्षण समुदाय की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है, इसलिए उसकी सेवाएं तत्काल समाप्त की गई हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के मामलों में भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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