'तेजाब हमला महिला की गरिमा व शारीरिक अखंडता पर अत्यंत क्रूर प्रहार', हिमाचल हाई कोर्ट ने खारिज की दोषियों की याचिका
हिमाचल हाई कोर्ट ने तेजाब हमले के दोषियों रेणुका और मोहिंद्र सिंह की सजा निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि तेजाब हमला महिला की गर ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जारगण आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने तेजाब हमला दोषियों की याचिका खारिज की।
तेजाब हमला महिला की गरिमा पर क्रूर प्रहार है।
दोषियों को 10 साल कठोर कारावास की सजा मिली थी।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने तेजाब हमले के मामले में दोषी ठहराए गए रेणुका और मोहिंद्र सिंह की सजा को निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर व न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि तेजाब हमला महिला की गरिमा और शारीरिक अखंडता पर अत्यंत क्रूर प्रहार है, इसलिए सजा के निलंबन पर कड़े नियम लागू होंगे।
यह मामला जिला कांगड़ा के पुलिस थाना जवाली के अंतर्गत एक संस्थान का है, जहां 12 सितंबर 2016 को पीड़िता पर तेजाब फेंका गया था। इस मामले में धर्मशाला के सत्र न्यायाधीश ने 29 नवंबर 2025 को आरोपितों को दोषी करार दिया था।
10 साल का कठोर कारावास
अदालत ने दोषियों रेणुका व मोहिंद्र को धारा 326-ए (तेजाब हमला) के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और 50,000 जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके अलावा धारा 201 (सुबूत मिटाने) के तहत एक वर्ष की कैद और 5,000 जुर्माने की सजा सुनाई थी।
दोष सिद्ध होने के बाद 'निर्दोष होने की धारणा' खत्म
खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी मामले में दोष सिद्ध होने के बाद आरोपित की 'निर्दोष होने की धारणा' खत्म हो जाती है। तेजाब हमले जैसे जघन्य अपराधों में सजा का निलंबन सामान्य रूप से नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह पीड़िता के जीने के अधिकार को छीन लेता है।