'असफल होने के बाद अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकता', हिमाचल हाई कोर्ट ने टिप्पणी के साथ अपील खारिज की
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले अभ्यर्थी, जो पूरी प्रक्रिया से वाकिफ थे, असफल होने पर चयन को चुनौती ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अभ्यर्थी पूरी प्रक्रिया को जानते हुए किसी भर्ती परीक्षा या साक्षात्कार में शामिल होता है तो असफल होने के बाद वह उस चयन प्रक्रिया को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकता। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने इस टिप्पणी के साथ चालक पद के एक अभ्यर्थी की अपील को खारिज कर दिया।
एक ही समय पर सहमति व विरोध नहीं जता सकते
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि कोई भी अभ्यर्थी परिणाम मनमुताबिक न आने पर चयन प्रक्रिया में कमियां नहीं निकाल सकता। अभ्यर्थी एक ही समय पर सहमति और विरोध नहीं जता सकते। या तो उन्हें प्रक्रिया में भाग ही नहीं लेना चाहिए था या फिर साक्षात्कार के तुरंत बाद उसे चुनौती देनी चाहिए थी।
फाइनल मेरिट में नहीं बना पाया जगह
याचिकाकर्ता अक्षय कुमार को पूर्व में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में 67 दिन के लिए 8,310 रुपये प्रतिमाह पर अस्थायी तौर पर चालक नियुक्त किया था। इस नियुक्ति की शर्त के अनुसार यह सेवा स्वतः ही समाप्त हो गई थी। इसके बाद निगम द्वारा अनुबंध आधार पर निकाली गई नई भर्ती में अक्षय कुमार ने दोबारा भाग लिया और छह फरवरी 2014 को साक्षात्कार दिया, लेकिन वह फाइनल मेरिट सूची में जगह बनाने में असफल रहा।
हाई कोर्ट पहुंचा याचिकाकर्ता
इसके बाद अभ्यर्थी ने साल 2017 में ट्रिब्यूनल के समक्ष याचिका दायर की, जो बाद में हाई कोर्ट ट्रांसफर हुई। सिंगल बेंच द्वारा याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता ने इस साल खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की थी।