हिमाचल: 'चिट्टा आरोपितों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकना सही नहीं', राज्यपाल ने क्यों उठाया सरकार के निर्णय पर सवाल?
हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि चिट्टा आरोपितों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकना कानूनी रूप से सही नहीं है। उन्होंने नशे के खिलाफ जन जागरू ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल। जागरण आर्काइव
HighLights
चिट्टा आरोपितों को पंचायत चुनाव से रोकना गलत।
नशे पर लगाम के लिए जन जागरूकता जरूरी।
शिपकी ला से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर विचार।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा है कि चिट्टा रखने के आरोपितों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकना कानूनन सही नहीं है। लोगों को बंधक नहीं बनाया जा सकता है, उनकी उन्मुक्तता को अधिक सीमा तक जाने पर रोक लगाना जरूरी है। शासन और प्रशासन के प्रयास नशे पर तब तक लगाम नहीं लगा सकते, जब तक जनता को इस संबंध में जागरूक नहीं किया जाएगा।
राज्यपाल ने शनिवार को शिमला में सेना के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि नशे के खिलाफ जब उनकी तरफ से अभियान चलाया गया था तो उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को बुलाया था। उस समय पंचायत प्रतिनिधियों ने उनसे पंचायत में ऐसे लोगों को दी जाने वाली सुविधाएं रोकने की बात कही थी।
उन्होंने इस पर कहा था कि पंचायत प्रतिनिधि ऐसा नहीं कर सकते, यदि अब सरकार यही काम करेगी तो इसकी सब में स्वीकार्यता होना संभव नहीं है। नशे को लेकर सिर्फ होर्डिंग और नारे लगाने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए जनता के बीच जाकर जन जागरण अभियान चलाना जरूरी है।
हिमाचल प्रदेश में 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव करवाए जाएंगे। हाई कोर्ट ने इस संबंध में सरकार को निर्देश दिया है।
शिपकी ला के रास्ते कैलास मानसरोवर यात्रा
राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला के रास्ते कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू करने के प्रश्न पर कहा कि इस विषय को राज्य सरकार ने भी केंद्र सरकार से उठाया है। अब विदेश मंत्रालय इस यात्रा को शुरू करने के विकल्पों पर काम कर रहा है। इन्हीं प्रयासों से शिपकी ला के रास्ते चीन अधिकृत तिब्बत से फिर व्यापार की शुरुआत होगी।