हिमाचल पंचायत चुनाव के लिए क्या है शैक्षणिक योग्यता और नियम? ये 9 गलतियां की तो हो जाओगे अयोग्य
हिमाचल प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव लड़ने के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है। पूर्ण साक्षर राज्य होने के कारण अनपढ़ व्यक्ति भी चुना ...और पढ़ें

हिमाचल पंचायत चुनाव के लिए हलचल तेज हो गई है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
हिमाचल पंचायत चुनाव में शैक्षणिक योग्यता की कोई अनिवार्यता नहीं है।
उम्मीदवार भारत का नागरिक और 21 वर्ष की आयु का हो।
सरकारी बकाया या आपराधिक मामलों में उम्मीदवार अयोग्य घोषित।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत व निकाय चुनाव लड़ने के लिए किसी भी प्रकार की शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है। हिमाचल प्रदेश को पूर्ण्र साक्षर राज्य घोषित कर दिया है। ऐसे में यदि कोई अंगूठा छाप भी चुनाव लड़ना चाहे तो उसके लिए कोई रोक नहीं है। राज्य में पंचायत से लेकर शहरी निकाय चुनावों में उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता की शर्त न होने के कारण कोई भी व्यक्ति, चाहे वह पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर चुनाव लड़ सकता है।
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम और नगर निकाय चुपाव अधिनियम में शैक्षिक योग्यता की कोई अनिवार्यता नहीं है, वहां पर केवल भारत का नागरिक होने के अलावा आयु, मतदाता पंजीकरण और अन्य सामान्य पात्रता शर्तें लागू हैं। किसी भी वर्ग के व्यक्ति को चुनाव लड़ने की स्वतंत्रता है।
लोकतंत्र में समान अवसर का सिद्धांत है जिसमें ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना। गरीब, वंचित और कम शिक्षित वर्गों को भी राजनीति में भागीदारी प्रदान करना है।
ये हैं स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के नियम
- उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए
- पंचायत व शहरी निकाय चुनाव के लिए आयु सीमा 21 वर्ष है
- संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम होना अनिवार्य है
- जिला परिषद व पंचायत समिति चुनाव के लिए किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता है।
- आरक्षित सीटों के लिए संबंधित वर्ग (एससी, एसटी, ओबीसी, महिला) की पात्रता
- कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता नहीं है
ये है अयोग्यता
- अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया व्यक्ति (विशेष अपराध में)
- अघोषित दिवालिया
- मानसिक रूप से अस्वस्थ (अदालत ने घोषित किया)
- सरकारी बकाया (जैसे बिजली, पानी, पंचायत टैक्स और देनदारी) का भुगतान न किया हो
- भ्रष्ट आचरण या चुनावी अपराध में दोषी
- नामांकन पत्र सही तरीके से न भरा हो तो हो सकते हैं अयोग्य घोषित
- शपथ पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी, संपत्ति और देनदारियों का विवरण सही न देना
- चुनाव खर्च की सीमा का पालन
- आचार संहिता का पालन करना आवश्यक
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