हिमाचल पंचायत चुनाव में उतरी राज्य की एक प्रतिशत जनसंख्या, आखिर राजनीतिक जागरूकता की क्या है वजह?
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव में 79,676 से अधिक लोगों ने नामांकन दाखिल कर रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी दर्ज की है। राज्य की उच्च साक्षरता दर और बढ़ती राजनी ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव में एक प्रतिशत जनसंख्या उतरी है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
79,676 से अधिक लोगों ने पंचायत चुनाव में नामांकन किया।
हिमाचल की उच्च साक्षरता दर राजनीतिक जागरूकता बढ़ा रही है।
शिक्षित युवा और पेशेवर भी चुनावी मैदान में उतरे हैं।
रोहित नागपाल, शिमला। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शिक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि राजनीतिक जागरूकता व लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए भी देशभर में अलग पहचान रखेगा। प्रदेश में हो रहे पंचायत चुनाव ने फिर साबित कर दिया है कि यहां के लोग लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी को गंभीरता से लेते हैं।
75 लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए इस बार 79,676 लोगों ने नामांकन दाखिल किए हैं। इनमें जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति, पंचायत प्रधान, उपप्रधान और पंचायत सदस्य पदों के प्रत्याशी शामिल हैं। यह आंकड़ा प्रदेश की राजनीतिक सक्रियता और लोगों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
निकाय चुनाव में तीन हजार लोग उतरे
इसके अलावा करीब तीन हजार लोग स्थानीय निकाय चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। प्रदेश की आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 68 लाख थी।
राजनीतिक जागरूकता की वजह
प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और बढ़ती साक्षरता भी इस राजनीतिक जागरूकता की बड़ी वजह मानी जा रही है। वर्ष 2011 में हिमाचल की साक्षरता दर 82.80 प्रतिशत थी, ये उस समय भी राष्ट्रीय औसत से अधिक थी। सितंबर 2025 तक प्रदेश की साक्षरता दर बढ़कर लगभग 99.30 प्रतिशत के करीब पहुंच चुकी है। इसका असर अब पंचायत चुनाव में भी दिखाई दे रहा है।
विकास आधारित राजनीति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
इस बार पंचायत चुनाव में केवल पारंपरिक ग्रामीण चेहरे ही नहीं, बल्कि स्नातकोत्तर, प्रोफेशनल डिग्री धारक और शिक्षित युवा भी बड़ी संख्या में चुनावी मैदान में उतरे हैं। इससे पंचायत व्यवस्था में नई सोच और विकास आधारित राजनीति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
3,754 पंचायतों में होगा चुनाव
प्रदेश की 3,754 पंचायतों में लगभग 50 लाख 79 हजार मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से करवाने के लिए करीब 35 हजार कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी लगाई है। 52,349 युवा मतदाता पहली बार मतदान करेंगे।
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क्या कहते हैं राजनीतिक विशलेषक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव में बढ़ती भागीदारी प्रदेश में लोकतांत्रिक चेतना के मजबूत होने का संकेत है। हालांकि अभी नामांकन वापसी की प्रक्रिया बाकी है। 15 मई तक कुछ उम्मीदवार चुनाव मैदान से हट सकते हैं, जिसके बाद प्रत्याशियों की अंतिम संख्या में कुछ कमी आ सकती है।