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    हिमाचल की हर पंचायत बताएगी मौसम का मिजाज, आपदा की अग्रिम चेतावनी सहित किसानों के लिए मिलेगी सलाह

    By Yadvinder Sharma Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Mon, 03 Aug 2026 11:27 AM (GMT+05:30)

    हिमाचल प्रदेश में केंद्र सरकार की विंड्स परियोजना के तहत अब हर पंचायत में मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी। यह परियोजना कृषि, बागवानी और आपदा प्रबंधन में स ...और पढ़ें

    हिमाचल की पंचायतों में मौसम की स्टीक जानकारी मिलेगी। प्रतीकात्मक फोटो

    हिमाचल की पंचायतों में मौसम की स्टीक जानकारी मिलेगी। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. हर पंचायत में रियल टाइम मौसम डेटा उपलब्ध होगा।

    2. कृषि, बागवानी और आपदा प्रबंधन में बड़ा बदलाव आएगा।

    3. किसानों को फसल बीमा दावों में पारदर्शिता मिलेगी।

    यादवेन्द्र शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश में मौसम की सटीक जानकारी अब तहसील मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी। केंद्र सरकार की विंड्स (मौसम सूचना नेटवर्क एवं डाटा सिस्टम)परियोजना के तहत जल्द ही हर पंचायत और क्लस्टर स्तर पर रियल टाइम मौसम संबंधी आंकड़े उपलब्ध होंगे। फिलहाल प्रदेश के 130 केंद्रों से ट्रायल डाटा मिलना शुरू हो गया है।

    परियोजना के तहत प्रदेश में 3,713 स्वचालित मौसम केंद्र (एडब्ल्यूएस) और स्वचालित रेन गेज (एआरजी) स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें 357 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 167 केंद्रों पर उपकरण लगाए जा चुके हैं।

    आपदा प्रबंधन में बदलाव की उम्मीद

    इस परियोजना से कृषि, बागवानी, फसल बीमा और आपदा प्रबंधन में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। अब स्थानीय स्तर पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का सटीक रिकार्ड उपलब्ध होने से फसल नुकसान के आकलन में पारदर्शिता आएगी और किसानों को बीमा दावों का बेहतर लाभ मिल सकेगा।

    अभी किसान और बागवान जिला या उपमंडल स्तर के मौसम पूर्वानुमानों पर निर्भर हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में कम दूरी पर भी मौसम तेजी से बदल जाता है। 

    रियल टाइम डाटा मिलेगा

    नए केंद्रों से वर्षा, तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और दिशा सहित सभी प्रमुख मौसम संबंधी आंकड़े रियल टाइम में उपलब्ध होंगे। यह डाटा भारतीय मौसम विभाग और राज्य सरकार की मौसम आधारित सलाह प्रणाली से जुड़कर किसानों तक पहुंचेगा। इन्हीं के आधार पर कृषि, बागवानी और आपदा प्रबंधन विभाग पंचायत स्तर पर मौसम आधारित सलाह और चेतावनी जारी करेंगे।

    केंद्र पांच से 10 किलोमीटर तक करेगा निगरानी

    प्रत्येक स्वचालित मौसम केंद्र पांच से 10 किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी करेगा, जबकि रेन गेज स्थानीय वर्षा का सटीक रिकार्ड उपलब्ध कराएंगे। केंद्रों का चयन ऊंचाई, जलवायु, खेती के रकबे, वर्षा पैटर्न और आबादी को ध्यान में रखकर किया गया है।

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    किसानों को होंगे ये प्रमुख लाभ

    • पंचायत स्तर पर सटीक मौसम और वर्षा की जानकारी।
    • सिंचाई, बुवाई और स्प्रे के सही समय का निर्धारण।
    • ओलावृष्टि, भारी वर्षा, बादल फटने और तेज हवाओं की अग्रिम चेतावनी।
    • फसल नुकसान के सटीक आकलन से बीमा दावों में पारदर्शिता।
    • कृषि, बागवानी और आपदा प्रबंधन विभागों को रियल टाइम डाटा।

    72 करोड़ की परियोजना, मार्च 2027 लक्ष्य

    केंद्र सरकार की 72 करोड़ रुपये की इस पूर्ण वित्तपोषित परियोजना का कार्य गुजरात और कानपुर की दो निजी कंपनियों को सौंपा गया है। मार्च 2027 तक प्रदेश के सभी चिह्नित स्थानों पर मौसम निगरानी केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    परियोजना से आपदा की पूर्व चेतावनी, प्रभावी प्रबंधन तथा कृषि एवं बागवानी फसलों को होने वाले नुकसान की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
    -सी पालरासु, सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज।

    प्रदेश में जिला आधार पर स्थिति 

    • जिला        कुल साइट    सिविल कार्य पूरा    उपकरण स्थापना    डाटा शुरू
    • कांगड़ा    844    223    129    115
    • शिमला    425    72    22    15
    • मंडी        586    44    16    -
    • सोलन    250    18    0    -
    • सिरमौर    271    0    0    -
    • हमीरपुर    260    0    0    -
    • चंबा        321    0    0     -
    • कुल्लू    227    0    0     -
    • किन्नौर    57    0    0    -
    • ऊना    255    0    0    -
    • बिलासपुर    184    0    0    -
    • लाहुल स्पीति    33    0    0    -
    • कुल    3713    357    167    130

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