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    हिमाचल पुलिस का नशा तस्करों पर बड़ा एक्शन, 12 गाड़ियां व तीन मकान समेत 4.41 करोड़ की संपत्ति जब्त

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Thu, 25 Jun 2026 12:25 PM (IST)

    सिरमौर पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स ने नशा तस्कर महमूद अली के सिंडिकेट की 4.41 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की है। इसमें 12 वाहन, एक ट्रक और तीन मक ...और पढ़ें

    हिमाचल पुलिस ने नशा तस्कर की संपत्ति जब्त की है। प्रतीकात्मक फोटो

    हिमाचल पुलिस ने नशा तस्कर की संपत्ति जब्त की है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. सिरमौर पुलिस ने 4.41 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त की।

    2. नशा तस्कर महमूद अली के सिंडिकेट पर कार्रवाई हुई।

    3. 12 वाहन, एक ट्रक और तीन मकान जब्त किए गए।

    जागरण टीम, शिमला। सिरमौर पुलिस एवं स्पेशल टास्क फोर्स ने नशा तस्करी के आरोपित महमूद अली तथा उसके ड्रग सिंडिकेट की करीब 4.41 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की है। आरोपित के 12 छोटे वाहन, एक ट्रक तथा तीन मकानों की पहचान कर उन्हें जब्त किया गया है। जब्त संपत्ति से संबंधित प्रकरण को विधिक कार्यवाही के लिए सक्षम प्राधिकारी नई दिल्ली को प्रेषित किया है, जहां संपत्ति की पुष्टि तथा स्थायी जब्ती की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। महमूद अली व उसके सहयोगियों के विरुद्ध हिमाचल और अन्य राज्यों में एनडीपीएस अधिनियम के कई मामले दर्ज हैं। 

    स्पेशल टास्क फोर्स ने मुख्य आरोपित महमूद अली को वर्तमान में पीआइटी एनडीपीएस एक्ट के तहत माडर्न सेंट्रल जेल नाहन में भेजा है।

    तस्करी से अर्जित की संपत्ति

    वित्तीय जांच में सामने आया कि महमूद अली, उसके स्वजन व सहयोगियों ने अफीम, चूरा-पोस्त तथा अन्य मादक पदार्थों की अंतरराज्यीय तस्करी से अवैध संपत्ति अर्जित की है। जांच में पाया गया कि पिछले छह वर्षों में आरोपितों की वैध आय मात्र 72,58,198 रुपये थी, जबकि अर्जित संपत्तियों का कुल मूल्य 4.41 करोड़ रुपये से अधिक है।

    अवैध मादक पदार्थ व्यापार से अर्जित धन की ओर संकेत

    आय और संपत्ति के बीच यह अत्यधिक अंतर स्पष्ट रूप से अवैध मादक पदार्थ व्यापार से अर्जित धन की ओर संकेत करता है। जांच में सामने आया है कि ड्रग सिंडिकेट द्वारा मैसर्स बुलबुल ट्रांसपोर्ट कंपनी तथा मैसर्स बुलबुल फ्रूट सप्लायर जैसी मुखौटा कंपनियों का उपयोग नशा तस्करी से अर्जित धन को वैध स्वरूप देने तथा अवैध गतिविधियों को छिपाने के लिए किया जा रहा था। 

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