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    हिमाचल से जुड़े बी2बी सप्लाई नेटवर्क के तार, ED ने दो जिलों में दी दबिश; गोवा के ड्रग-मनी लांड्रिंग मामले में जांच

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Mon, 19 Jan 2026 11:23 AM (IST)

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोवा से जुड़े ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और सोलन जिलों में छापेमारी की। ईडी ने बी2बी नशीले पदार् ...और पढ़ें

    गोवा से जुड़े ड्रग-मनी लांड्रिंग मामले में ईडी ने हिमाचल में भी दबिश दी है। प्रतीकात्मक फोटो

    गोवा से जुड़े ड्रग-मनी लांड्रिंग मामले में ईडी ने हिमाचल में भी दबिश दी है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. ईडी ने हिमाचल के कुल्लू-सोलन में छापेमारी की।

    2. गोवा ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़े तार।

    3. बी2बी नशीले पदार्थों की आपूर्ति नेटवर्क का भंडाफोड़।

    जागरण संवाददाता, शिमला। गोवा से जुड़े ड्रग-मनी लांड्रिंग मामले के तार हिमाचल से भी जुड़े हैं। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कुल्लू व सोलन जिले के विभिन्न स्थानों पर दबिश दी। ईडी गत दिवस से सोलन व कुल्लू में ड्रग तस्करी का कनेक्शन जांच रही है। रविवार को भी ईडी की कार्रवाई जारी रही।

    ईडी की जांच में पता चला है कि नशीले पदार्थों की बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) आपूर्ति हिमाचल तक फैली हुई है।

    सात राज्यों में 26 ठिकानों पर दी थी दबिश

    ईडी के पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने 16 जनवरी को सात राज्यों (गोवा, दिल्ली, ओडिशा, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक) के 26 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया था।
    यह कार्रवाई गोवा पुलिस की मादक पदार्थ निरोधक शाखा द्वारा दर्ज एफआइआर के आधार पर की गई है। इसमें व्यावसायिक मात्रा में ड्रग तस्करी का मामला दर्ज है।

    ईडी ने कैश व अन्य उपकरण किए जब्त

    ईडी के प्रवक्ता ने कहा कि जांच में सामने आया है कि गोवा से संचालित संगठित गिरोह के तार हिमाचल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, केरल के साथ जुड़े हैं। यहां नशीले पदार्थों की व्यावसायिक स्तर पर आपूर्ति की जा रही थी, जिससे राज्य की भूमिका इस अंतरराज्यीय नेटवर्क में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। तलाशी के दौरान ईडी ने लगभग तीन करोड़ रुपये नकद, आपत्तिजनक दस्तावेज और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।

    कुरियर और डाक सेवाओं का सुनियोजित इस्तेमाल

    डिजिटल जांच में पता चला है कि एमडीएमए, चरस, कोकेन समेत कई प्रतिबंधित मादक पदार्थों की आपूर्ति के लिए कुरियर और डाक सेवाओं का सुनियोजित इस्तेमाल किया जा रहा था। अपराध से अर्जित धन को यूपीआइ, बैंक ट्रांसफर, डिजिटल करेंसी और नकद लेनदेन के जरिये घुमाया गया। रकम छिपाने के लिए लेयरिंग और जटिल वित्तीय ढांचे अपनाए गए।

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