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    हिमाचल में कौन बनेगा निर्वाचन व मुख्य सूचना आयुक्त, जल आयोग अध्यक्ष का कार्यकाल भी हो रहा पूरा

    By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sun, 02 Aug 2026 11:04 AM (IST)

    हिमाचल सरकार जल्द ही संवैधानिक संस्थाओं के रिक्त और रिक्त होने वाले प्रमुख पदों पर नियुक्तियां कर सकती है, जिनमें मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य निर्वाचन ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद रिक्त।

    2. जल आयोग अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त, आयोग के भविष्य पर संशय।

    3. प्रबोध सक्सेना राज्य निर्वाचन आयुक्त पद के संभावित उम्मीदवार।

    राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार जल्द ही संवैधानिक संस्थाओं के रिक्त और रिक्त होने वाले प्रमुख पदों पर नियुक्तियां कर सकती है। मुख्य सूचना आयुक्त (सीआइसी) का पद लंबे समय से खाली है, जबकि राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची का कार्यकाल इसी माह और हिमाचल प्रदेश जल आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 11 अगस्त को समाप्त हो रहा है। इस कारण प्रशासनिक हलकों में नई नियुक्तियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में

    मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार के रूप में राम सुभग सिंह का कार्यकाल दो वर्ष बढ़ाए जाने के बाद अब राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं। सूत्रों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष प्रबोध सक्सेना को इस पद की जिम्मेदारी मिल सकती है।

    मुख्य सूचना आयुक्त का पद लंबे समय से खाली

    मुख्य सूचना आयुक्त के लंबे समय से रिक्त पद को भरने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बार पात्रता की सभी शर्तें पूरी करने वाले किसी गैर-आइएएस अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपने पर विचार कर रही है।

    जल आयोग के भविष्य पर संशय

    उधर, 18 हजार करोड़ रुपये के जल उपकर के उद्देश्य से गठित हिमाचल प्रदेश जल आयोग के भविष्य पर भी संशय बना हुआ है। शुरुआती दौर में सरकार को अपने उपक्रमों से करीब 200 करोड़ रुपये का उपकर मिला था, लेकिन 41 जल विद्युत कंपनियों द्वारा उच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने के बाद मामला लंबित है और आयोग का कामकाज लगभग ठप है। ऐसे में 11 अगस्त को अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आयोग की अवधि आगे न बढ़ाकर इसे निष्क्रिय ही छोड़ सकती है।

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