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    हिमाचल प्रदेश के 47 नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त, विकास कार्यों को स्वीकृति के लिए सरकार ने दिए वित्तीय अधिकार

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sat, 24 Jan 2026 05:32 PM (IST)

    हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के 47 नगर निकायों में वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी, कार्यकारी अधिकारी और सचिव को प्रशासक नियुक्त किया है। यह निर्णय दैनिक प्र ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. 47 नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त किए गए।

    2. एसडीएम को विकास कार्यों की स्वीकृति के अधिकार मिले।

    3. दैनिक प्रशासनिक कार्य सुचारु रखने हेतु निर्णय।

    राजन पुंडीर, नाहन। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के 47 नगर निकायों में वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी, कार्यकारी अधिकारी और सचिव को प्रशासक नियुक्त करने के आदेश जारी किए हैं। ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से जनहित में की गई हैं। सरकार ने सभी संबंधित जिला अधिकारियों, उपमंडल अधिकारियों और नगर निकाय अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, हिमाचल प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1994 की धारा 268(1) के तहत यह व्यवस्था की गई है। आदेश के तहत संबंधित नगर निकायों के सुचारू संचालन के लिए एसडीएम (उपमंडल अधिकारी नागरिक) को एक लाख से पांच लाख रुपये तक के विकास कार्यों को स्वीकृति देने के प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं। प्रशासनिक व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक सरकार द्वारा आगे कोई आदेश जारी नहीं किए जाते हैं। 

    इन नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त

    जिन नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त किए गए हैं, उनमें बिलासपुर, श्रीनयना देवी, घुमारवीं, तलाई, चंबा, डलहौजी, चुवाड़ी, सुजानपुर टिहरा, नादौन, भोटा, कांगड़ा, नूरपुर, नगरोटा बगवां, देहरा, ज्वालामुखी, बैजनाथ-पपरोला, जवाली, शाहपुर, कुल्लू, मनाली, भुंतर, बंजार, सुंदरनगर, सरकाघाट, जोगिंद्रनगर, नेरचौक, रिवालसर, करसोग, रोहड़ू, रामपुर, ठियोग, सुन्नी, नारकंडा, चौपाल, कोटखाई, जुब्बल, नाहन, पांवटा साहिब, राजगढ़, नालागढ़, परवाणु, अर्की, संतोसगढ़, मैहतपुर-बसदेहरा, दौलतपुर-चौक, गगरेट और टाहलीवाल शामिल हैं।

    इस कारण लिया निर्णय

    शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय नगर निकायों के दैनिक प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों को बाधित होने से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।

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