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    Shimla: चलौंठी में भवनों में दरारें आने के मामले में SDM ने DC को सौंपी रिपोर्ट, ...ब्लास्टिंग से नुकसान; मुआवजे पर फिर सवाल

    By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sun, 18 Jan 2026 05:20 PM (IST)

    शिमला के चलौंठी में भवनों में दरारों की जांच रिपोर्ट एसडीएम ने उपायुक्त को सौंप दी है। कैथलीघाट-ढली फोरलेन टनल निर्माण के दौरान हुई ब्लास्टिंग को इसका ...और पढ़ें

    शिमला के चलौंठी में घरों में आई दरारें। जागरण आर्काइव

    शिमला के चलौंठी में घरों में आई दरारें। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. चलौंठी भवनों में दरारों की जांच रिपोर्ट सौंपी गई।

    2. टनल निर्माण ब्लास्टिंग से हुए नुकसान की पुष्टि।

    3. मुआवजे के लिए एनएचएआई को पत्र लिखा गया।

    जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला शहर में चलौंठी नामक जगह पर अचानक भवनों में दरारें आने के मामले में प्रशासन ने जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। भवनों में दरारों की वजह पता लगा ली है। कैथलीघाट-ढली फोरलेन परियोजना के तहत चलौंठी में टनल निर्माण के दौरान किए ब्लास्टिंग कार्य से बहुमंजिला भवन में दरारें आई थीं।

    इस मामले में एसडीएम (ग्रामीण) मनजीत शर्मा ने रिपोर्ट बना ली है। एसडीएम ने यह रिपोर्ट उपायुक्त अनुपम कश्यप को सौंप दी है।

    हालांकि, अभी तक संपत्ति को हुए वास्तविक नुकसान का मूल्यांकन किया जाना शेष है। इसमें यह तय होना बाकी है कि कुल कितनी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है और उसकी आर्थिक क्षति कितनी है। इसी के आधार पर आगे मुआवजे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

    मुआवजे के लिए एनएचएआइ को पत्र लिखा : उपायुक्त

    उपायुक्त अनुपम कश्यप का कहना है कि प्रभावित परिवारों की हरसंभव सहायता की जा रही है। जहां नुकसान ज्यादा है, वहां उचित मुआवजा देने के लिए एनएचएआइ को पत्र लिखा है। प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रभावित परिवार के साथ अन्याय न हो और उन्हें नियमानुसार राहत मिले। हालांकि स्थानीय लोगों को आशंका है कि कहीं यह मामला भी लिंडीधार की तरह लंबा न खिंच जाए।

    लिंडीधार क्षेत्र में गिर गया था बहुमंजिला मकान

    उनका कहना है कि जब तक नुकसान का निष्पक्ष और समयबद्ध मूल्यांकन नहीं होता और मुआवजे को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता तब तक उनकी परेशानियां बनी रहेंगी। 
    इससे पहले लिंडीधार क्षेत्र में टनल निर्माण के दौरान एक बहुमंजिला मकान गिर गया था। उस समय प्रशासन ने माना था कि मकान ध्वस्त हो गया है और पीड़ित परिवार को पांच करोड़ रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए थे।

    इसके बावजूद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने मुआवजा देने से इन्कार कर दिया था। एनएचएआइ का तर्क था कि किसी भी प्रकार का मुआवजा उनकी आंतरिक समिति से परामर्श के बाद ही दिया जाता है।

    ब्लास्टिंग तकनीक और सुरक्षा मानकों पर सवाल

    लिंडीधार की घटना के बाद से ही स्थानीय लोग फोरलेन परियोजना में अपनाई जा रही ब्लास्टिंग तकनीक और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि ब्लास्टिंग के समय तेज धमाकों और कंपन के कारण उनके मकानों की दीवारों, छतों और सीढ़ियों में दरारें पड़ गई हैं, जिससे जान-माल का खतरा बना हुआ है।

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