हिमाचल प्रदेश की ‘सियासत’ की परीक्षा लेगा राज्यसभा चुनाव, बहुमत के बावजूद टेंशन में क्यों कांग्रेस?
हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव कांग्रेस और भाजपा के लिए सियासी परीक्षा है। 40 सीटें होने के बावजूद कांग्रेस चिंतित है, क्योंकि 2024 में अभिषेक मनु स ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव पर हलचल तेज हो गई है।
HighLights
कांग्रेस 40 सीटों के बावजूद राज्यसभा चुनाव को लेकर चिंतित।
पिछली बार क्रॉस-वोटिंग से हर्ष महाजन ने जीत दर्ज की थी।
कांग्रेस हाईकमान गुटबाजी रोकने और एकजुटता पर केंद्रित।
रोहित नागपाल/अनिल ठाकुर, शिमला। राज्यसभा का चुनाव कांग्रेस-भाजपा की सियासी परीक्षा लेने को तैयार है। कांग्रेस के पास 40 सीटें हैं, बावजूद इसके कांग्रेस चिंता में है। प्रदेश के नेताओं के अलावा पार्टी के कई राष्ट्रीय नेता भी इस सीट पर नजर रखे हुए हैं। वर्ष 2024 में कांग्रेस अभिषेक मनु सिंघवी को प्रत्याशी बनाकर बहुमत होते हुए भी हार गई थी।
तब कांग्रेस के छह विधायकों सहित तीन निर्दलीय जो सरकार को समर्थन दिए हुए थे, सभी ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट किया था। अब कांग्रेस 40 और भाजपा के 28 सदस्य हैं। इस बार भी कोई खेला न हो जाए, इसको लेकर कांग्रेस में चिंता है।
गुटबाजी चरम पर
कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है। इस बार हाईकमान की भी नजर चुनाव पर रहेगी। कांग्रेस नेताओं की मानें तो पिछली गलतियों को इस बार नहीं दोहराया जाएगा। सूत्रों की मानें तो चुनाव से पहले पार्टी हाईकमान की ओर से पदाधिकारियों की तैनाती की जाएगी जिसमें प्रत्याशी को लेकर सहमति बनाई जाएगी।
कांग्रेस से भाजपा में गए थे हर्ष, जीत भी कांग्रेस विधायकों ने दिलाई
हर्ष महाजन कांग्रेस से पहले मंत्री रह चुके हैं। वह कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष थे, उन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। राज्यसभा चुनाव में उन्हें जीत दिलाने में भी कांग्रेस विधायकों की भूमिका थी। क्रास वोटिंग से कांग्रेस से भाजपा ने राज्यसभा की सीट छीन ली थी। हर्ष महाजन चुनाव जीते थे। इसके बाद राज्य में राजनीतिक संकट भी खड़ा हो गया था। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि पार्टी हाईकमान ने बाद में उन्हें मना लिया था।
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ऐसे रोचक हुआ था चुनाव
वर्ष 2024 में भाजपा के हर्ष महाजन और कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी को 34-34 वोट मिले थे। पर्ची सिस्टम से महाजन जीत गए थे। कांग्रेस प्रत्याशी को 40 विधायकों के बावजूद 34 वोट मिले थे। भाजपा ने कांग्रेस के छह व तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चुनाव जीता था।
यह है स्थिति
वर्तमान में कांग्रेस के 40 व भाजपा के 28 विधायक हैं। भाजपा के राज्यसभा सदस्य हर्ष महाजन का कार्यकाल 2030 और डा. सिकंदर कुमार का कार्यकाल 2028 में समाप्त होना है।
कांग्रेस प्रत्याशी पर भाजपा की नजर
इस चुनाव में भाजपा की रणनीति कांग्रेस प्रत्याशी पर नजर रखने की है। कांग्रेस किसे उम्मीदवार बनाती है, यह तय होने के बाद ही भाजपा अपने पत्ते खोलने की तैयारी में दिख रही है। विधानसभा चुनाव अगले वर्ष प्रस्तावित हैं, इसलिए भाजपा इस चुनाव में कोई उलटफेर करेगी, इसकी उम्मीद नहीं है।
क्या कहते हैं जयराम ठाकुर
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कहना है किराज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने पर पार्टी हाईकमान से चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा। पार्टी इस मामले में गंभीरता से विचार कर रणनीति तैयार करेगी।
पूर्व मंत्री का दावा कई कांग्रेस विधायक घुटन महसूस कर रहे
पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर का कहना है कि 2024 के चुनाव में कांग्रेस ने ही खेल खेला था। मौजूदा समय में भी कांग्रेस के कई विधायक घुटन महसूस कर रहे हैं। इसका लाभ चुनाव में भाजपा को मिलेगा।
बिकाऊ माल जा चुका : सुरेश
कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि बिकाऊ माल पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। चुनाव होता या न होता वह पहले से बिके हुए थे। कांग्रेस विधायक एकजुट हैं और जीत कांग्रेस प्रत्याशी की होगी।
खेल हमेशा नियमों के तहत खेला जाता है। भाजपा की सोच लोकतंत्र के लिए खतरा है। भाजपा के पास कोई जादुई छड़ी नहीं है जो वह अपनी जीत देख रही है। धनबल व खरीद फरोख्त पर भाजपा विश्वास रखती है जो इस बार नहीं होने वाला।
-जगत सिंह नेगी, राजस्व मंत्री।
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