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'हिमाचल के सरकारी स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा मिले तो ज्यादा फीस देने को भी तैयार', अभिभावकों का विभाग को फीडबैक

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 11 Apr 2026 01:28 PM (IST)

शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने निपा शोधार्थियों से हिमाचल के सरकारी स्कूलों पर फीडबैक लिया। शोधार्थियों ने शिमला के स्कूलों ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों को लेकर अभिभावकों ने राय दी है। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों को लेकर अभिभावकों ने राय दी है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. निपा शोधार्थियों ने हिमाचल के सरकारी स्कूलों का अध्ययन किया।

  2. अभिभावक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु अधिक फीस देने को तैयार।

  3. क्लस्टर प्रणाली और शिक्षकों के नवाचारों की सराहना की गई।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने समग्र शिक्षा निदेशालय में फील्ड से लौटे निपा (एनआइईपीए) के शोधार्थियों से विस्तृत फीडबैक प्राप्त किया। ये शोधार्थी एक सप्ताह की फील्ड स्टडी के तहत शिमला जिले के तीन क्लस्टरों के तहत आने वाले स्कूलों में गए थे, जहां उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का तथ्यात्मक अध्ययन किया। 

टीम ने चार से नौ अप्रैल तक जिले के देवगढ़, गुम्मा और देहा क्लस्टरों के स्कूलों का दौरा कर शिक्षण कार्यक्रमों, नीतियों के क्रियान्वयन और शिक्षा की गुणवत्ता का अध्ययन किया। शोधार्थियों ने बच्चों, शिक्षकों और स्थानीय समुदाय से संवाद कर क्षेत्र में रहकर वास्तविक परिस्थितियों को गहराई से समझा।

अध्ययन के दौरान क्लस्टर प्रणाली, रिसोर्स शेयरिंग और पैडागाजी जैसे विषयों पर चर्चा की गई। निपा के शोधार्थियों ने बच्चों के एप्टीट्यूड टेस्ट के माध्यम से उनके करियर विकल्प, सोशो-इमोशनल स्किल्स और क्रिटिकल थिंकिंग का आकलन किया। साथ ही शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग से संबंधित गतिविधियां भी आयोजित की गईं। 

प्रयासों की सराहना

इस फीडबैक में क्लस्टर सिस्टम को सकारात्मक पहल बताया गया और कई स्कूलों में शिक्षकों के किए जा रहे नवाचारपूर्ण प्रयासों की सराहना की गई। स्कूल अधोसंरचना, मिड-डे मील और निश्शुल्क वर्दी जैसी योजनाओं को भी प्रभावी माना गया। 

अभिभावकों ने दिए सुझाव

शोधार्थियों ने पाया कि सीबीएसई पैटर्न लागू होने के बाद निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों की ओर रुझान बढ़ा है। अभिभावकों ने शिक्षा सुधारों की सराहना कर कहा कि यदि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होती है, तो वे इसके लिए ज्यादा फीस चुकाने के लिए भी तैयार हैं। इससे बच्चों का शहरों की ओर पलायन कम होने की संभावना भी कम होगी।

क्या कहते हैं एसएसए परियोजना निदेशक

एसएसए के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा ने निपा के सहयोग से एक्सटेंशन एंड कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्राम की शुरुआत कर शोधार्थियों को फील्ड के लिए रवाना किया था। शनिवार को निदेशालय में आयोजित बैठक के दौरान शोधार्थियों ने अपने अध्ययन के निष्कर्षों पर आधारित संक्षिप्त प्रस्तुति दी।

स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए उठा रहे कदम : कंवर

शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा कि सरकार स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए ठोस कदम उठा रही है। सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की शुरुआत का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। राज्य में क्लस्टर प्रणाली लागू की गई है, जिससे स्कूलों के बीच संसाधनों का बेहतर उपयोग और साझा व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। सरकार अपने कुल बजट का लगभग 18 प्रतिशत शिक्षा पर व्यय कर रही है।

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