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    हिमाचल पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने नहीं उतारे जिला परिषद प्रत्याशी, इन विधायकों ने अपने स्तर पर कर दी घोषणा

    By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Thu, 07 May 2026 11:02 AM (IST)

    हिमाचल पंचायती राज चुनाव में भाजपा ने जिला परिषद प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है, जबकि कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। हालांकि, क ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने जिला परिषद प्रत्याशी तय नहीं किए हैं, लेकिन विधायक अपने स्तर पर घोषणा कर रहे हैं।

    हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने जिला परिषद प्रत्याशी तय नहीं किए हैं, लेकिन विधायक अपने स्तर पर घोषणा कर रहे हैं।

    HighLights

    1. भाजपा ने सभी जिलों में जिला परिषद प्रत्याशी घोषित किए।

    2. कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर प्रत्याशी नहीं उतारे, विधायक कर रहे समर्थन।

    3. यह चुनाव विधानसभा से पहले सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे।

    राज्य ब्यूरो, शिमला। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। विपक्षी दल भाजपा ने मंगलवार को प्रदेश के सभी जिलों में जिला परिषद प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है, भले ही चुनाव पार्टी चुनाव चिह्न पर नहीं होता। पिछले चुनाव में भी भाजपा ने इसी तरह का प्रयोग किया था। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल कांग्रेस प्रत्याशी घोषित करने से बचती रही है।

    इसका मुख्य कारण यह है कि कांग्रेस ने कभी जिला परिषद चुनाव के लिए आधिकारिक रूप से प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की। कांग्रेस के विधायक अब अपने स्तर पर जिला परिषद के प्रत्याशियों की घोषणा कर रहे हैं और उन्हें समर्थन देने के साथ-साथ जीतने की अपील भी कर रहे हैं।

    पिछले माह प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्वयं इसकी घोषणा की थी कि पार्टी कोई प्रत्याशी चुनावी मैदान में नहीं उतारेगी। इसके बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने भी इस बात की पुष्टि की। विनय संगठन से संबद्ध रखने वाले नेताओं को आगे लाने की पैरवी कर चुके हैं।

    कांग्रेस विधायकों ने यहां दिया खुला समर्थन

    सोलन जिला के दून विधानसभा क्षेत्र, ऊना जिला के चिंतपूर्णी और कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्रों और जिला कांगड़ा के शाहपुर में कांग्रेस विधायकों ने अपने करीबी नेताओं को जिला परिषद का प्रत्याशी बताया है और उन्हें समर्थन दिया है।

    अध्यक्ष की कुर्सी का है प्रश्न

    चुनाव के बाद हर जिला में जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन किया जाता है। चुने हुए जिला परिषद सदस्यों में से ही दो को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाया जाता है। जो सरकार बनाती है, उनके साथ अधिकतर सदस्य जुड़ जाते हैं। भाजपा ने पिछली बार भी अधिकृत प्रत्याशी उतारे थे ताकि बाद में कोई विवाद न रहे। जिला परिषद अध्यक्ष को कार्यालय और सरकारी वाहन की सुविधा मिलती है।

    जीत में दबदबा रखने के लिए कसी कमर

    प्रधान, उपप्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद का चुनाव भले ही पार्टी चुनाव चिह्न पर न हो, लेकिन दोनों ही दल अपना दबदबा बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। यह चुनाव सत्ता का सेमीफाइनल हैं, क्योंकि इसके बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में हर विधायक और मंत्री चाह रहा है कि ज्यादा से ज्यादा प्रधान, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य उनके करीबी बनें। चुनावी रणनीति और समीकरण साधने को लेकर दलों के भीतर मंथन तेज हो गया है, जिसमें भाजपा सबसे आगे नजर आ रही है। जिला परिषद को लेकर लगातार संगठनात्मक स्तर की बैठकें हो रही हैं।

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    जिला परिषद सदस्य का चुनाव पार्टी चुनावचिह्न पर नहीं होता। कांग्रेस ने निर्णय लिया है कि जिला परिषद पद के लिए प्रत्याशी की घोषणा नहीं की जाएगी। संगठन की विचारधारा से संबंध रखने वाला कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है, उस पर कोई रोक नहीं है। विधायकों के करीबी यदि कोई चुनावी मैदान में उतरे हैं तो वे उन्हें अपना समर्थन दे सकते हैं। जिप सदस्य के लिए पार्टी की ओर से किसी ने भी कोई अधिकारिक प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। 
    -विनोद जिंटा, महासचिव (संगठन), हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी।

     

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