शिमला में सेब बागवानों के लिए नई मुसीबत, तुड़ान और पैकिंग के लिए 900 रुपये तक दिहाड़ी मांग रहे मजदूर; बढ़ेगी लागत
शिमला में सेब सीजन के दौरान मजदूरों की दिहाड़ी 800-900 रुपये तक पहुंचने से बागवानों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। बागवान परिवहन भाड़े की तरह मजदूरी दरें ...और पढ़ें

सेब तुड़ान के लिए मजदूर न मिलने से बागवान परेशान हैं। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
सेब तुड़ान, ग्रेडिंग, पैकिंग की दिहाड़ी 800-900 रुपये पहुंची।
बढ़ती मजदूरी से छोटे और मध्यम बागवानों की लागत बढ़ी।
बागवानों ने मजदूरी दरें तय करने की प्रशासन से मांग की।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला में सेब सीजन ने अब गति पकड़नी शुरू कर दी है। इस बीच बागवानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती दिहाड़ी दरें बनकर उभरी हैं। सेब की तुड़ान, ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए मजदूरों की मांग बढ़ने के साथ ही दिहाड़ी 800 से 900 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इसका सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम बागवानों पर पड़ रहा है, जिनके लिए उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
मनमाने ढंग से बढ़ जाती है दिहाड़ी
बागवानों का कहना है कि प्रशासन हर वर्ष सेब ढुलाई के लिए परिवहन भाड़ा तो तय करता है, लेकिन मजदूरी की दरों को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सीजन के दौरान मजदूरों की कमी का फायदा उठाकर दिहाड़ी मनमाने ढंग से बढ़ा दी जाती है।
बागवानों का कहना है कि इस मुद्दे को हर साल प्रशासन और पंचायतों के समक्ष उठाया जाता है, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं बन पाई है।
उत्पादन लागत पर सीधा असर
ठियोग के बागवान पवन शर्मा, संजीव शर्मा कोटखाई के बागवान सुरेश चौहान और चौपाल के बागवान मंजीत मेहता ने बताया कि सेब सीजन के दौरान तुड़ान, पैकिंग और ग्रेडिंग के लिए अलग-अलग मजदूरों की आवश्यकता होती है। मांग बढ़ने के कारण मजदूरी में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे उत्पादन लागत भी बढ़ रही है।
परिवहन भाड़े की तरह तय हो मजदूरी
बड़े बागवान इस अतिरिक्त खर्च को किसी हद तक वहन कर लेते हैं, लेकिन सीमित उत्पादन वाले छोटे किसान आर्थिक दबाव में आ जाते हैं। बागवानों ने मांग की है कि जिस तरह परिवहन भाड़े के लिए प्रशासन दरें निर्धारित करता है, उसी तरह सेब सीजन के दौरान मजदूरी की दरों के लिए भी एक पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि इससे मजदूरों और बागवानों दोनों के हितों का संतुलन बना रहेगा और छोटे किसानों को राहत मिल सकेगी।
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पिछली जिला परिषद में भी उठ चुका है मामला
सेब सीजन की दिहाड़ी का मामला पिछली जिला परिषद में भी बार बार उठता रहा है। इस दौरान जिला परिषद के सदस्यों ने जिला उपायुक्त के समक्ष भी मामला उठाया था। इसके बावजूद भी अभी तक सेब सीजन की दिहाड़ी के निर्धारण को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जा गया है। इसके कारण बागवानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।