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    शिमला शहर में लैंडस्लाइड से खतरे में 10 भवन, जमीन दरकने से हर पल दहशत में लोग; फ्लैट व घर खाली किए

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sat, 25 Jul 2026 01:57 PM (IST)

    शिमला के लोअर पंथाघाटी में भारी बारिश और अवैज्ञानिक खोदाई के कारण भूस्खलन से 10 भवन खतरे में आ गए हैं। दहशत के माहौल में एक फ्लैट और एक घर को खाली करा ...और पढ़ें

    शिमला शहर के पंथाघाटी में भूस्ख्लन से खतरे में भवन। जागरण

    शिमला शहर के पंथाघाटी में भूस्ख्लन से खतरे में भवन। जागरण

    HighLights

    1. शिमला के लोअर पंथाघाटी में भूस्खलन से 10 भवन खतरे में।

    2. अवैज्ञानिक खोदाई के कारण पहाड़ी कमजोर हुई, दहशत का माहौल।

    3. एक फ्लैट, एक घर खाली कराया, एसडीएम ने निर्माण रोका।

    जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में चंबा से लेकर शिमला भारी बारिश व भूस्खलन ने तबाही मचाई है। शिमला के लोअर पंथाघाटी क्षेत्र भूस्खलन की जद में आ गया है। लगातार वर्षा के बीच पहाड़ी में दरारें आने और जमीन खिसकने की आशंका से लोगों में दहशत का माहौल है। यहां खतरा बढ़ने से एक फ्लैट व एक घर को लोगों ने स्वयं एहतियातन शुक्रवार को खाली कर दिया है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है, जबकि आसपास के कई अन्य मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। यहां करीब 10 भवन खतरे में हैं। 

    एसडीएम ग्रामीण मंजीत शर्मा ने मौके का निरीक्षण किया और भवन निर्माण व खोदाई का काम रुकवा दिया है। एसडीएम ने कहा कि एहतियात के तौर पर एक मकान खाली करवा दिया है।

    अवैज्ञानिक खोदाई से पनपा खतरा 

    स्थानीय निवासी चेतन मेहता ने आरोप लगाया कि बरसात में भवन निर्माण के लिए ठेकेदार के गलत तरीके से की खोदाई के कारण पहाड़ी कमजोर हो गई। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त सुरक्षा उपाय अपनाए की खोदाई का खामियाजा अब आसपास रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

    जीवनभर की पूंजी खर्च कर खरीदा था फ्लैट

    प्रभावित लोगों में एक मैकेनिक भी शामिल है, जिसने जीवनभर की कमाई से इस क्षेत्र में एक फ्लैट खरीदा था। अब खतरे के चलते उसे अपना घर खाली करना पड़ रहा है। उसका कहना है कि उसने बड़ी मुश्किल से अपना आशियाना बनाया था, लेकिन अब परिवार की सुरक्षा के लिए उसे घर छोड़ना पड़ रहा है। 

    पहाड़ी की स्थिरता का आकलन जरूरी

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया तो आसपास के अन्य मकानों को भी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि भू-वैज्ञानिकों की टीम से निरीक्षण करवाया जाए, पहाड़ी की स्थिरता का आकलन किया जाए और प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक राहत एवं सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

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    लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्यों और खोदाई की नियमित निगरानी की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके। वहीं प्रशासन की ओर से क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी एहतियाती कदम उठाए जाएंगे।

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