शिमला में HPSA के नाम से वायरल प्रस्ताव की क्या है सच्चाई? ASP को सौंपी जांच; DSP से गाड़ी वापस लेने का मामला
शिमला में हिमाचल पुलिस सेवा एसोसिएशन (HPSA) के नाम से सोशल मीडिया पर एक फर्जी प्रस्ताव वायरल हुआ है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं। एसप ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवा एसोसिएशन के वायरल प्रस्ताव की जांच एएसपी को सौंपी गई है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
HPSA के नाम से फर्जी प्रस्ताव सोशल मीडिया पर वायरल।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए।
एसपी शिमला ने मामले की जांच एएसपी को सौंपी।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इंटरनेट मीडिया पर हिमाचल पुलिस सेवा एसोसिएशन (एचपीएसए) के नाम से प्रसारित एक कथित प्रस्ताव ने हड़कंप मचा दिया है। इस दस्तावेज में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाकर विभाग की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी कार्यालय शिमला में तैनात एएसपी को मामले की जांच सौंपी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जी दस्तावेज को सबसे पहले किसने अपलोड किया और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
क्या सुनियोजित साजिश
डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए पोस्ट के सोर्स, शेयरिंग पैटर्न और फर्जी अकाउंट्स की जांच की जा रही है। पुलिस को शक है कि यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसका मकसद विभाग की छवि खराब करना और जनता में भ्रम फैलाना है।
फर्जी प्रस्ताव में क्या दावा
प्रस्तावित दस्तावेज में दावा किया गया है कि 29 मार्च 2026 को एचपीएसए की बैठक में प्रस्ताव पास हुआ, जिसमें एक डीएसपी से सरकारी गाड़ी वापस लेने के निर्णय को गलत ठहराया गया। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों पर निजी प्रभाव और पक्षपात के आरोप भी लगाए गए, लेकिन जांच में सामने आया है कि संबंधित अधिकारी सरकारी गाड़ी के लिए अधिकृत ही नहीं थे, क्योंकि उनके पास फील्ड की जिम्मेदारी नहीं थी।
जरूरत के हिसाब से वापस ली जा सकती है गाड़ी
सूत्रों के मुताबिक, जिस स्थान पर अधिकारी सरकारी गाड़ी के साथ मौजूद थे, वह उनके अधिकार क्षेत्र में भी नहीं आता। जब इस बारे में जवाब मांगा गया तो अधिकारी ने लिखित में यह बात स्वीकार की। नियम कहते हैं कि एसपी कार्यालय में तैनात अफसरों से जरूरत के हिसाब से गाड़ी वापस ली जा सकती है, जबकि उपमंडलों में तैनात डीएसपी और थानों पर यह नियम लागू नहीं होते।
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एचपीएसए ने भी किया इन्कार
अहम बात यह है कि एचपीएसए ने खुद इस तरह का कोई प्रस्ताव जारी करने से इन्कार कर दिया है। इससे साफ हो गया है कि प्रसारित दस्तावेज पूरी तरह संदिग्ध है और इसे जानबूझकर फैलाया गया।
एचपीएसए के नाम पर प्रसारित पत्र फर्जी है। इस मामले में लिखित शिकायत मिलने के बाद जांच जारी है।
-गौरव सिंह, एसपी शिमला।
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