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    शिमला में बिल्डर ने पैसे लेकर भी नहीं दिया फ्लैट, रेरा ने 10% ब्याज सहित 78 लाख रुपये लौटाने का दिया आदेश

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Wed, 17 Jun 2026 12:29 PM (IST)

    रेरा ने शिमला के मशोबरा हिल्स परियोजना के डेवलपर को फ्लैट खरीदार को 78.10 लाख रुपये ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया है। कंपनी को 60 दिनों के भीतर ...और पढ़ें

    शिमला में फ्लैट न देने पर बिल्डर पर रेरा ने एक्शन लिया है। प्रतीकात्मक फोटो

    शिमला में फ्लैट न देने पर बिल्डर पर रेरा ने एक्शन लिया है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. रेरा ने मशोबरा हिल्स डेवलपर को राशि लौटाने का आदेश दिया।

    2. खरीदार को 78.10 लाख रुपये 10.80% ब्याज सहित मिलेंगे।

    3. डेवलपर को 60 दिन में भुगतान करने का सख्त निर्देश।

    राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) ने शिमला के समीप मशोबरा स्थित आवासीय परियोजना मशोबरा हिल्स के डेवलपर के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। रेरा ने परियोजना विकसित कर रही कंपनी मैसर्स राजदीप एंड कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिए हैं कि वह फ्लैट खरीदार को जमा करवाई पूरी राशि ब्याज सहित वापस करे। रेरा ने घर खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करते हुए यह निर्णय सुनाया।

    रेरा के चेयरमैन आरडी धीमान और सदस्य विदुर मेहता की पीठ ने यह फैसला बिहार के पटना निवासी नमिता सिंह द्वारा दायर शिकायत पर सुनाया। 

    2024 में फ्लैट देने की कही थी बात

    शिकायतकर्ता ने परियोजना में दो बेडरूम का फ्लैट बुक करवाया था और बुकिंग राशि व निर्माण लागत के रूप में 78.10 लाख रुपये का भुगतान किया था। शिकायत के अनुसार बिल्डर ने आश्वासन दिया था कि फ्लैट का कब्जा 30 दिसंबर 2024 तक सौंप दिया जाएगा। इसके साथ निवेश पर सात प्रतिशत वार्षिक सुनिश्चित रिटर्न का भी वादा किया था। लेकिन तय समयसीमा गुजरने के बाद भी न तो फ्लैट का कब्जा दिया और न ही किसी प्रकार का मुआवजा या राहत प्रदान की। 

    2027 तक तिथि बढ़ाने की कोशिश की

    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि बिल्डर ने बाद में एक नया समझौता पत्र तैयार कर कब्जा देने की तिथि वर्ष 2027 तक बढ़ाने का प्रयास किया। रेरा ने माना कि यह कदम खरीदार की सहमति के बिना उठाया गया और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    वादों को पूरा करने में विफल रहा डेवलपर

    अथॉरिटी ने कहा कि डेवलपर ने खरीदार को परियोजना की वास्तविक स्थिति के बारे में पारदर्शी जानकारी नहीं दी तथा किए वादों को पूरा करने में विफल रहा। यह आचरण रेरा अधिनियम, 2016 की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन है। आदेश में यह भी उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता को बैंक ऋण की किस्तें चुकानी पड़ रही थीं, जिससे उसे आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

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    10 प्रतिशत ब्याज सहित रकम लौटाने का निर्देश

    रेरा ने कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वह आदेश जारी होने के 60 दिन के भीतर पूरी जमा राशि 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करे। अथारिटी ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर रेरा अधिनियम की धारा 40 के तहत वसूली और अन्य कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। 

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