शिमला जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर आज रात सियासी पहरा, निर्दलीय सदस्यों पर कांग्रेस-भाजपा दोनों की नजर
शिमला जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के लिए सोमवार को सियासी जंग होगी, जिसमें दो निर्दलीय सदस्यों की भूमिका अहम मानी जा रही है। ...और पढ़ें

शिमला जिला परिषद के भाजपा समर्थित सदस्य पूर्व सीएम जयराम ठाकुर के साथ।
HighLights
शिमला जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव सोमवार को होगा।
दो निर्दलीय सदस्यों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कांग्रेस-भाजपा बहुमत के लिए सदस्यों को एकजुट रखने में जुटी।
जागरण संवाददाता, शिमला। राजधानी शिमला में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए सोमवार को सियासी जंग होने वाली है। सोमवार को होने वाली जिला परिषद की बैठक और चुनाव से पहले कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने-अपने समर्थित सदस्यों को एकजुट रखने में पूरी ताकत झोंकेंगे। वहीं दोनों निर्दलीय जिला परिषद सदस्यों की भूमिका भी सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मौजूदा सियासी समीकरणों में भाजपा के पास 12 सदस्यों का समर्थन बताया जा रहा है, जबकि कांग्रेस के साथ 11 सदस्य हैं। ऐसे में दोनों निर्दलीय सदस्यों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। 25 सदस्यों वाली जिला परिषद में बहुमत के लिए 13 का आंकड़ा चाहिए।
अंतिम समय तक जोड़-तोड़
अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने के लिए दोनों दल अंतिम समय तक जोड़-तोड़ और रणनीति बनाने में जुटे हैं। राजनीतिक गलियारों में दिनभर बैठकों और संपर्क अभियान का दौर चलता रहा।
3 महीने से चल रही गतिविधियां
जिला परिषद की सत्ता हासिल करने के लिए पिछले करीब तीन महीने से राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। दोनों दल लगातार अपने समर्थित सदस्यों के संपर्क में हैं और किसी भी तरह की टूट-फूट रोकने का प्रयास कर रहे हैं। चुनाव से ठीक पहले भी दोनों खेमे अपने-अपने सदस्यों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
तो बदल जाएगा पूरा समीकरण
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दोनों निर्दलीय सदस्य एक ही दल के पक्ष में जाते हैं तो जिला परिषद का सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। सोमवार सुबह जिला उपायुक्त कार्यालय के बचत भवन में चुनाव होना है। ऐसे में दोनों दलों के सदस्य निर्दलीय के साथ साथ अपने सदस्यों पर भी नजर बनाए हुए है।
निर्दलीय सदस्यों पर नजर तेज
यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ने निर्दलीय से संपर्क तेज कर दिया है। सोमवार को होने वाली बैठक में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी। जिला परिषद चुनाव को लेकर शिमला का सियासी माहौल पूरी तरह गर्म है। अब देखना होगा कि रातभर चलने वाली राजनीतिक कवायद किस दल के लिए फायदेमंद साबित होती है और सोमवार को जिला परिषद की कमान किसके हाथ में जाती है।