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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 27, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    हिमाचल के तीन निर्दलीय विधायकों का कहां फंस रहा पेंच? विधानसभा अध्यक्ष ने अब तक नहीं किया इस्तीफा स्वीकार

    Updated: Wed, 27 Mar 2024 02:04 PM (IST)

    Himachal Pradesh Politics हिमाचल प्रदेश में तीन निर्दलीय विधायकों का पेंच अभी भी फंसा हुआ है। शिमला के तीन निर्दलीय विधायकों होशियार सिंह केएल ठाकुर औ ...और पढ़ें

    Himachal Politics: हिमाचल के तीन निर्दलीय विधायकों का कहां फंस रहा पेंच?
    Himachal Politics: हिमाचल के तीन निर्दलीय विधायकों का कहां फंस रहा पेंच?

    HighLights

    1. तीन निर्दलीय विधायकों का अब तक इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है
    2. शिकायत होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष को लेना पड़ेगा कोई निर्णय

    शिमला, प्रकाश भारद्वाज। (Himachal Politics) शिमला तीन निर्दलीय विधायकों होशियार सिंह, केएल ठाकुर और आशीष शर्मा के विधानसभा से इस्तीफे पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ही निर्णय लेंगे। अध्यक्ष चाहें तो भाजपा सदस्यता ग्रहण करने वाले तीनों विधायकों को स्वत: संज्ञान लेकर अयोग्य करार दे सकते हैं।

    इस्तीफा स्वीकार न होने की सूरत में यदि कोई व्यक्ति विधानसभा सचिवालय में शिकायत करता है कि निर्दलीय विधायकों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है और उनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की जाए। इस बारे में भाजपा की ओर से भी विधानसभा को शिकायत की जा सकती है। उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष निर्णय ले सकते हैं।

    अदालत का खटखटा सकते हैं दरवाजा

    त्यागपत्र स्वीकार न होने की स्थिति में भाजपा की सदस्यता लेने वाले तीनों निर्दलीय विधायक हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं कि विधानसभा अध्यक्ष जानबूझकर उनके त्यागपत्र स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष अदालत का आदेश मानने के लिए बाध्य होंगे और उन्हें निर्दलीय विधायकों का त्यागपत्र स्वीकार करना पड़ेगा।

    कांग्रेस के छह विधायक दो दिनों में हुए अयोग्य

    मामले में यह भी तर्क दिया जा सकता है कि कांग्रेस के छह विधायकों को दो दिन के भीतर अयोग्य घोषित कर दिया गया, जबकि निर्दलीय विधायकों के त्यागपत्र स्वीकार नहीं किए जा रहे।त्यागपत्र स्वीकार होने पर होगा उपचुनाव त्यागपत्र स्वीकार होने पर उपचुनाव की स्थिति पैदा होगी। विधानसभा सचिवालय तीनों सीटों को रिक्त घोषित करेगा। यह सूचना चुनाव आयोग के पास जाएगी और उसके बाद ही उपचुनाव की प्रक्रिया आरंभ होगी।

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