किशाऊ बांध से दिल्ली सहित 5 राज्यों में दूर होगी पानी की किल्लत, 32 KM लंबी झील में डूबेंगे हिमाचल व उत्तराखंड के गांव
किशाऊ बांध हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध होगा, जिससे दिल्ली सहित पांच राज्यों को सिंचाई और पेयजल मिलेगा। हालांकि, इस पर ...और पढ़ें

हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर यहां किशाऊ बांध बनेगा। जागरण
HighLights
किशाऊ बांध एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध होगा।
दिल्ली सहित पांच राज्यों को सिंचाई व पेयजल मिलेगा।
परियोजना से हिमाचल-उत्तराखंड के कई गांव जलमग्न होंगे।
जागरण संवाददाता, नाहन। किशाऊ बांध हिमाचल व उत्तराखंड की सीमा पर जिला सिरमौर के शिलाई विधानसभा के मोहराड शंभर खेड़ा में टिहरी के बाद एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध होगा। किशाऊ बांध 236 मीटर ऊंचा और 680 मीटर लंबा होगा। इसके बनने से हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को 97076 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
दिल्ली को होगा सबसे ज्यादा लाभ
सबसे ज्यादा लाभ दिल्ली को होगा, जहां पीने के पानी की आपूर्ति को पूरा किया जाएगा। केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 में इसको राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया है। मौजूदा समय में टिहरी बांध एशिया का सबसे ऊंचा बांध है, जिसकी ऊंचाई 260 मीटर है।
32 किलोमीटर लंबी झील बनेगी
इस परियोजना के अंतर्गत हिमाचल के शिलाई क्षेत्र के मोहराड़ से लेकर उत्तराखंड के त्यूणी तक 32 किलोमीटर की लंबी झील बनेगी।
6 पंचायतें होंगी प्रभावित
अभी तक की सर्वेक्षण रिपोर्ट में बांध की जद में 81300 पेड़, 631 लकड़ी के मकान, 171 पक्के मकान, उत्तराखंड व हिमाचल के 632 सामूहिक परिवार, 508 एकल परिवार, आठ मंदिर, छह पंचायतें, दो अस्पताल, सात प्राथमिक पाठशालाएं, दो माध्यमिक स्कूल और एक इंटर कालेज आएगा।
हिमाचल और उत्तराखंड दोनों की जमीन आएगी
इस परियोजना का कुल क्षेत्र 2950 हेक्टेयर है, जिसमें हिमाचल की 1498 और उत्तराखंड की 1452 हेक्टेयर भूमि बांध में जलमग्न हो जाएगी। दोनों राज्यों के करीब 900 परिवार प्रभावित होंगे।
सिरमौर के ये गांव होंगे प्रभावित
किशाऊ बांध परियोजना बनने से कई गांव प्रभावित होंगे। इनमें उपमंडल शिलाई के गांव मोहराड़, मशवाड, कंड्यारी, नेरा, बड़ालानी, सियासु, थनाणा, धारवा और शिमला जिले के गुम्मा, फेलग, अंतरोली और उत्तराखंड के क्वानु, सावर, कोटा सहित 17 गांव प्रभावित होंगे।