हिमाचल प्रदेश के नौणी विश्वविद्यालय ने फीस में की दोगुना से अधिक वृद्धि, 87 हजार के बजाय देने होंगे 1.42 लाख रुपये
डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से फीस में 52% से 62% तक की बढ़ोतरी की है। इससे हजारों छात्रों पर भारी ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश नौणी विश्वविद्यालय का सोलन स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
नौणी विश्वविद्यालय ने 2026-27 से फीस में 52-62% तक की वृद्धि की।
स्नातकोत्तर फीस 87,550 से 1,42,000; स्नातक फीस 83,350 से 1,27,200 हुई।
एडमिशन, परीक्षा, ग्रीन चार्ज में भी बढ़ोतरी, छात्रों पर आर्थिक बोझ।
जागरण संवाददाता, सोलन। हिमाचल प्रदेश में डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी (सोलन) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से फीस में बढ़ोतरी लागू कर दी है। नई शुल्क संरचना के अनुसार स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों की फीस में 62.19 तथा स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रमों की फीस में 52.61 प्रतिशत तक वृद्धि की है। विश्वविद्यालय के इस फैसले से हजारों छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सामान्य व सेल्फ फाइनांस सीटों पर बढ़ोतरी की दरें लागू की हैं। सबसे अधिक असर सेल्फ फाइनांस सीटों पर पढ़ने वाले छात्रों पर पड़ा है।
87 हजार से 1.42 लाख हुई फीस
पिछले शैक्षणिक सत्र में जिन स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए 87,550 प्रति सेमेस्टर फीस ली जा रही थी, उसे बढ़ाकर 1,42,000 रुपये प्रति सेमेस्टर कर दिया है। स्नातक सेल्फ फाइनांस पाठ्यक्रमों की फीस 83,350 से बढ़ाकर 1,27,200 रुपये प्रति सेमेस्टर कर दी है।
ट्यूशन फीस में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
विश्वविद्यालय ने सबसे बड़ी बढ़ोतरी ट्यूशन फीस में की है, जिसका असर छात्रों की वार्षिक पढ़ाई की लागत पर पड़ेगा। इसके अलावा प्रवेश शुल्क में भी दोगुनी से अधिक वृद्धि की है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए एडमिशन फीस 7,000 से बढ़ाकर 20,000 तथा स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए 7,000 से बढ़ाकर ₹15,000 रुपये कर दी है।
परीक्षा शुल्क भी महंगा
परीक्षा शुल्क भी छात्रों के लिए महंगा हो गया है। पहले जहां प्रत्येक सेमेस्टर का 3,000 रुपये परीक्षा शुल्क लिया जाता था, वहीं अब 5,000 देने होंगे। इस वर्ष विश्वविद्यालय ने दो नए शुल्क भी लागू किए हैं। अब छात्रों से रिसर्च एंड प्रोजेक्ट फंड के नाम पर 5,000 प्रति सेमेस्टर तथा इंडस्ट्रियल विजिट के लिए 5,000 प्रति वर्ष अतिरिक्त वसूले जाएंगे।
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ग्रीन चार्ज भी बढ़ाया
ग्रीन चार्ज में भी तीन गुना से अधिक बढ़ोतरी की है। पहले छात्रों से 150 रुपये प्रति सेमेस्टर लिया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 500 प्रति सेमेस्टर कर दिया है।
प्लेसमेंट गाइडेंस शुल्क
प्लेसमेंट गाइडेंस शुल्क भी 200 से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रति सेमेस्टर कर दिया है। कई निजी विश्वविद्यालयों में यह शुल्क पूरे कोर्स के दौरान केवल एक बार लिया जाता है, जबकि यहां प्रत्येक सेमेस्टर छात्रों को इसका भुगतान करना होगा। विश्वविद्यालय के इस निर्णय के बाद छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि सरकारी विश्वविद्यालयों में लगातार बढ़ रही फीस से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना और कठिन होता जा रहा है।
यह निर्णय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुसंधान अवसंरचना, प्रायोगिक एवं क्षेत्रीय सुविधाओं, छात्र सेवाओं तथा अन्य शैक्षणिक संसाधनों के रखरखाव पर बढ़ती लागत के आकलन पर लिया है। फीस संशोधन शैक्षणिक सुविधाओं, प्रायोगिक प्रशिक्षण तथा छात्र सहायता सेवाओं को और सुदृढ़ करने में मददगार होगा।
-डा. हरमिंद्र सिंह बवेजा, कुलपति, डा. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी।
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