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    फिर गुलजार हुआ पहलगाम का सेल्फी पॉइंट, हमले के एक साल बाद कैसे हैं बैसरन घाटी के हालात? पर्यटकों ने बताया अनुभव

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 09:58 PM (IST)

    एक साल पहले हुए आतंकी हमले के बाद पहलगाम में पर्यटन फिर से गुलजार हो गया है। सुरक्षाबलों की मेहनत और स्थानीय लोगों के सहयोग से घाटी में डर का माहौल खत ...और पढ़ें

    पिछले साल 22 अप्रैल को हुआ था आतंकी हमला (बैसरन घाटी- फाइल फोटो)

    पिछले साल 22 अप्रैल को हुआ था आतंकी हमला (बैसरन घाटी- फाइल फोटो)

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    नवीन नवाज, श्रीनगर। ठीक एक वर्ष पहले पहलगाम में गोलियों की गूंज ने हंसी के ठहाकों को पत्थर को पिघला देने वाले बैन में बदल दिया था। पहलगाम की बहार पूरी तरह से खिजा में बदल गई। डर और सन्नाटा ही चारों तरफ फैल गया था। यहां जो हुआ था,उसने पूरी वादी को ही नहीं पूरे देश का झकझोर दिया था। 26 मासूम जिंदगियां उस दिन आतंक की भेंट चढ़ गईं। वह सिर्फ एक हमला नहीं था, बल्कि कश्मीर के पर्यटन, लोगों के विश्वास और इंसानियत पर गहरा वार था।

    पर्यटकों ने सिर्फ पहलगाम से ही नहीं पूरी वादी से दूरी बनाना शुरु कर दी,लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और पहलगाम में फिर से पर्यटकों का आगमन शुरू हो चुका है। पहलगाम का सेल्फी प्वायंट जहां बीते साल मौत का सन्नाटा पसरा था,अब लोग पूरे उत्साहक केसाथ वहां तस्वीरें लेते हैं।यह बदलाव अचानक नहीं आया, इसके पीछे सुरक्षा बलों की कड़ी मेहनत और प्रशासन की सतत कोशिशें हैं

    पहलगाम अटैक के बाद सूनी हुई घाटी

    आतंकी हमले से हुए नुकसान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मई 2025 से पहली अप्रैल 2026 तक पहलगाम में 4.30 लाख पर्यटक आए हैं जबकि मई 2024 से पहली अप्रैल 2025 तक 10 लाख से ज्यादा पर्यटक पहलगाम की सैर कर चुके थे। सिर्फ पहली अप्रैल 2025 से 22 अप्रैल 2025 को आतंकी हमले तक पहलगाम में 1.37 लाख पर्यटक आए थे। मौजूदा वर्ष में पहली जनवरी से अप्रैल के पहले पखवाड़े तक पहलगाम में 2.54 लाख पर्यटक आए हैं जबकि बीतेवर्ष इसी अवधि के दौरान पहलगाम में 4.63 लाख पर्यटक आए थे।

    आज का पहलगाम, उस पहलगाम से सर्वथा भिन्न है जो 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद से नजर आया था।अब यहां सड़कों पर रौनक है, दुकानों में चहल-पहल है और पर्यटकों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। कर्नाटक, दिल्ली, तमिलनाडु, पंजाब- देश के हर कोने से लोग फिर से इस वादी की ओर लौट रहे हैं।

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    पहलगाम का मुख्य बाजार आज किसी त्योहार से कम नहीं लगता। रंग-बिरंगी दुकानों पर भीड़ है, चाय की दुकानों से उठती भाप में फिर से जिंदगी की खुशबू महसूस होती है। टट्टू वालों की पुकार, टैक्सी चालकों की आवाजें- सब कुछ वापस लौट आया है।

    पहलगाम मार्किट एसोसिएशन के अध्यक्ष मुख्तार अहमद ने कहा कि हमने अतीत को पीछे छोड़ दिया है। अब हम आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम उस काले दिन औरउसके बाद केहालात को याद नहीं करना चाहते। यहां कारोबार की हालत का अंदाजा इसीबात से लगा सकते हैं कि आतंकीहमले से पहले यहां पहलगाम में रोजाना चार हजार के करीब पर्यटक आ रहे थे । अगर आज तुलना करें तो यह संख्या आधी से कम हो चुकी है,लेकिन उन दिनों से बेहतर है जब यहां होटलों,रेस्तरां पर ताले लगे हुए थे।

    पौनी ऐसोसिएशन के पदाधिकारी रौऊफ ने कहा कि आतंकियों ने यहां पर्यटकों को कत्ल नहीं किया था,उन्होंने कश्मीरियत को कत्ल करते हु,सैंकड़ों कश्मीरियों से उनकी रोजी रोटी छीन ली थी। यहां छह हजार के घोड़े और टट्टू हैं, जिन पर पर्यटक सवारी करते हैंऔर कईयों के घर का चूल्हा जलता है। पर्यटकां की आमद बंद होने से कई चूल्हे ठंडे हो गए थे। टैकसीचालकों के लिए बैंक का कर्ज लौटाना मुश्किल हो रहा था।

    पर्यटकों ने बताया कैसा रहा अनुभव

    सेल्फी प्वायंट पर तस्वीर ले रही कोलकत्ता की जोया ने कहा कि हम पहले भी यहां आ चुके हैं। इस वर्ष यहं आने से बय रहे थे लेकिन जब दोस्तों ने कहा कि अब यहां काफी सुरक्षा है तो चले आए। यहां आकर लगा कि यह जगह तो पहले से भी ज्यादा खूबसूरत हो चुकी है। यह जगह दिल को छू लेती है। मुख्तार अहमद ने कहा कि एक साल पहले यहां सेल्फी प्वायंट विरान हो गया था,आज यहां कैमरे की क्लिक और हंसी गूंज रही है।

    पहलगाम के विधायक अल्ताफ अहमद कालू ने कहा कि आज पहलगाम में फिर से अगर रौनक बहाल होती नजर आ रही है तो इसके पीछे किसी एक इंसान की नहीं समूचे कश्मीर की मेहनत है। यहां के लोगों की मेहनतर है, सुरक्षाबलों की मेहनत है, यहां की सरकार की मेहनत है। आज यहां सुरक्ष्ज्ञा का पूरा बंदोबस्त है।

    जगह जगह नाके हैं,इलैक्ट्रानिक सर्वेलांस हो रहा है,जिससे स्थानीय लोगों मे ही नहीं पर्यटकों में भी विश्वास की एक नयीभावना पैदा हुई है। पहलगाम में पर्यटको को आकर्षित करने के लिए विभिन् फेस्टिवल आयोजित किए गए हैं,यहां टूर आप्रेटरों का सम्ेलन भी आयोजित किया गया । इसके अलावा देश विदेश में हमारेपर्यटन विभाग ने रोड शो किए हैं।पहलगाम में आतंक मचाने वालों का सुरक्षाबलो ंने सफाया कर दिया है।

    आतंकवाद के खिलाफ हुआ प्रदर्शन

    पहलगाम होटल औनर्स एसोसिएशन के प्रधान मुश्ताक पहलगामी ने कहा कि हम उन पहले लोगों में से थे, जिन्होंने हमले के बाद सड़कों पर उतरकर 2025 में आतंकवाद के खिलाफ एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया था लेकिन अब हम चाहते हैं कि पूरा देश आगे आए और पहलगाम आकर यहां के स्थानीय लोगों का समर्थन करे। ऐसा करके हम उन आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को नाकाम कर देंगे, जिनका मकसद कश्मीर को तबाह करना था।

    उन्होंने कहा कि लोगों को शायद सैयद आदिल हुसैन शाह की याद न हो,वही आदिल हुसैन जिसने कश्मीरियत पर हुए हमले को राेकने के लिए्र, पर्यटकों को बचाने के लिए आतंकियों की गोलियों की आने अपना सीना कर दिया था। यहां सज्जाद बट भी है,जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना पर्यटकोंको अपनी पीठ पर बैठाकर नीचे सुरक्ष्ज्ञित पहुंचाया।

    आतंकियों ने हमला कश्मीर और कश्मीरियत के कत्ल के लिए किया था,लेकिन कश्मीरियत और कश्मीर दोनों पहले से ज्यादा मजबूत हुए हैं। आज यहां कोई आतंकियों से नहीं डरता, आतंकवाद के खिलाफ सब खड़े हैं,क्योंकि डर के आगे जीत है। आज आप पहलगाम में घूमें तो खुद ही कहेंगे कि अगर हिम्मत और इंसानियत साथ हो, तो सबसे अंधेरे समय को भी रोशनी में बदला जा सकता है।

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