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    महबूबा मुफ्ती की बहन के अपहरण से लेकर सरला भट्ट हत्याकांड तक... कश्मीर में आतंक फैलाने वाले यासीन मलिक की कहानी

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 08:46 AM (IST)

    सरला भट्ट हत्याकांड में 35 साल बाद SIA ने यासीन मलिक सहित पांच आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यासीन मलिक का नाम 90 के दशक में कश्मीर में आतंक ...और पढ़ें

    कश्मीर में आतंक फैलाने वाले यासीन मलिक की कहानी (जागरण ग्राफिक्स)

    कश्मीर में आतंक फैलाने वाले यासीन मलिक की कहानी (जागरण ग्राफिक्स)


    HighLights

    1. SIA ने 35 साल बाद सरला भट्ट हत्याकांड में चार्जशीट दाखिल की

    2. JKLF कमांडर यासीन मलिक समेत पांच आतंकी आरोपी बनाए गए

    3. यह हत्या कश्मीरी हिंदुओं को घाटी से भगाने की साजिश थी

    डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आतंकवाद के शुरुआती दौर की सबसे खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाओं में से एक 'सरला भट्ट अपहरण और हत्याकांड' में 35 साल बाद एक बड़ा और निर्णायक मोड़ सामने आया है।

    जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के तत्कालीन कमांडर मोहम्मद यासीन मलिक समेत पांच आतंकियों के खिलाफ विशेष अदालत में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।

    SIA के मुताबिक, यह नृशंस हत्याकांड कोई आम घटना नहीं थी, बल्कि यह कश्मीरी हिंदुओं के मन में खौफ पैदा करने और उन्हें घाटी छोड़ने पर मजबूर करने की एक सोची-समझी और सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा थी।

    इन पांच लोगों को बनाया गया आरोपी

    एसआईए के अनुसार, जांच में मोहम्मद यासीन मलिक, खुर्शीद अहमद चालकू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की भूमिका सामने आई है।

    इसमें अब्दुल हमीद, सोफी और टपलू मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं, जबकि यासीन मलिक दिल्ली की तिहाड़ जेल में आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।

    वह पूर्व गृह मंत्री मुफ्ती मो. सईद की बेटी रुबैया सईद अपहरण कांड और 1990 में वायुसेना के चार कर्मियों की हत्या के मामलों में भी मुकदमे का सामना कर रहा है।

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    कौन है यासीन मलिक?

    यासीन मलिक श्रीनगर का रहने वाला है। आतंकी हिंसा के साथ वह कश्मीर के युवाओं को हमेशा अलगाववाद की राह पर ले गया। साल1980 में तला पार्टी के नाम से एक अलगाववादी गुट तैयार करने वाले यासीन मलिक ने वर्ष 1983 में अपने साथियों के साथ मिलकर श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में उस पिच को खोद दिया था, जहां भारत और वेस्टइंडीज के बीच मैच होने जा रहा था।

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    तला पार्टी 1986 में इस्लामिक स्टूडेंट्स लीग बनी और मलिक उसका महासचिव था। साल 1987 में मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले अलगाववादी विचाराधारा के विभिन्न संगठनों ने जमात-ए-इस्लामी का चुनाव लड़ा था।

    इस चुनाव में मलिक व उसके साथ यूसुफ शाह पोलिंग एजेंट थे। यूसुफ शाह ही आज हिजबुल मुजाहिदीन का सुप्रीम कमांडर सैयद सलाहुद्दीन है।

    यासीन मलिक कश्मीर के उन चार आतंकियों में एक है, जो तथाकथित तौर पर सबसे पहले आतंकी ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान गया था। इन चार आतंकियों को हाजी ग्रुप कहा जाता रहा है। इनमें हमीद शेख, अश्फाक मजीद वानी, यासीन मलिक और जावेद मीर शामिल थे। हमीद और अश्फाक दोनों ही मारे जा चुके हैं।

    कश्मीर में यासीन मलिक

    साल 1987 के शुरुआती दौर में यासीन मलिक और उसके साथी कश्मीर की आजादी के नारे के साथ कश्मीरी मुस्लिमों को बरगलाने लगे। उन्होंने कश्मीरी हिंदुओं को चुन-चुनकर मारा और उन्हें कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर किया।

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    यासीन मलिक ने अपने साथियों संग मिलकर आठ दिसंबर 1989 को तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की छोटी बेटी रूबिया सईद का अपहरण किया था। यह मामला भी अदालत में विचाराधीन है।

    साल 1990 के अगस्त में यासीन मलिक हिंसा फैलाने के मामले में जेल गया और साल 1994 में वह जेल से रिहा हुआ। जेल से निकलते ही उसने कहा कि वह अब बंदूक नहीं उठाएगा, लेकिन कश्मीर की आजादी के लिए लड़ेगा।

    साल 1994 में जेल से छूटने के बाद 1998 तक वह कई बार पकड़ा गया और कभी एक माह तो कभी तीन माह बाद जेल से छूटता रहा है। अक्टूबर 1999 में यासीन मलिक को पुलिस ने राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में सलिंप्तता के आधार जन सुरक्षा अधिनियम के तहत बंदी बनाया था। कुछ वक्त बाद वह जेल से छूट गया और 26 मार्च 2002 को उसे हवाला से संबंधित एक मामले में पोटा के तहत गिरफ्तार किया गया था।

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    साल 2009 में उसने पाकिस्तान की रहने वाली मुशाल मलिक से शादी की। मुशाल मलिक एक चित्रकार है। दोनों की एक बेटी रजिया सुल्तान है जो वर्ष 2012 में पैदा हुई है। वर्ष 2013 में उसने पाकिस्तान में लश्कर के सरगना हाफिज सईद के साथ मिलकर कश्मीर में सुरक्षाबलों पर आम कश्मीरियों के मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए धरना दिया था।

    सरला भट्ट केस में आरोपी

    कश्मीर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत सरला भट्ट का 18 अप्रैल, 1990 को अस्पताल के निकट से अपहरण कर लिया गया था। फिर उनके साथ ऐसी बेरहमी की गई, जिसे आज भी कश्मीर में फैले आतंकवाद काला अध्याय माना जाता है।

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    सरला भट्ट के साथ दुष्कर्म और मारपीट की गई। बाद में उन्हें श्रीनगर के उमर कालोनी में गोलियों से भून दिया। इसके बाद से दो दशक तक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का तांडव होता रहा।

    अगले दिन गोलियों से छलनी उनका शव मिला था। सरला भट्ट की हत्या का उद्देश्य कश्मीरी हिंदुओं में भय पैदा करना और उनके पलायन की परिस्थितियां पैदा करना था। इस हत्याकांड के बाद पलायन तेजी से बढ़ा था।

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