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    कब उड़ान भरेगा Bokaro Airport ? सालों से फाइलों में अटका सवाल

    By Birendra Kumar Pandey Edited By: Mritunjay Pathak
    Updated: Thu, 30 Apr 2026 07:08 PM (IST)

    Bokaro Airportः बोकारो एयरपोर्ट के संचालन में हो रही देरी को लेकर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य राजनीतिक तनाव को कम करना था। ...और पढ़ें

    बोकारो हवाईअड्डा चालू करने को लेकर उपायुक्त अजय नाथ झा ने की समीक्षा।

    बोकारो हवाईअड्डा चालू करने को लेकर उपायुक्त अजय नाथ झा ने की समीक्षा।

    HighLights

    1. बोकारो एयरपोर्ट संचालन में लगातार हो रही देरी।

    2. प्रदूषण बोर्ड से 'कंसेंट टू ऑपरेट' मुख्य बाधा।

    3. एएआई की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे।

    जागरण संवाददाता, बोकारो। धनबाद में एयरपोर्ट निर्माण को लेकर वर्तमान सांसद ढुलू महतो और पूर्व सांसद पीएन सिंह के धनबाद में हुए संयुक्त आंदोलन से बोकारो शहर में बढ़ी राजनीतिक गर्मी पर गुरुवार को समाहरणालय में समीक्षा बैठक कर ठंडा पानी डालने का प्रयास किया गया।

    उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में प्रशासन ने गंभीरता का संदेश देने की कोशिश की, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आई।

    दरअसल, इन्हीं अधिकारियों ने नवंबर 2025 तक हवाई सेवा शुरू करने की टाइमलाइन तय की थी, जिसे पूरे हुए अब पांच महीने बीत चुके हैं। बावजूद इसके, एयरपोर्ट संचालन अब भी कागजी प्रगति और अधूरे कार्यों के बीच अटका हुआ है।

    इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि समीक्षा बैठकों की सक्रियता और वास्तविक कार्य प्रगति के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है। बैठक में पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना, अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी, वन पदाधिकारी संदीप शिंदे, डीएसपी (आईबी) नेहा गडकरी, मुख्यालय डीएसपी अनिमेश गुप्ता, सिविल सर्जन डॉ. ए.बी. प्रसाद, डीएलएओ द्वारिका बैठा, अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    शेष कार्यों की लंबी सूची, तय समयसीमा पर दबाव

    बैठक में स्पष्ट हुआ कि एयरपोर्ट संचालन के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य अब भी अधूरे हैं। दुंदीबाग क्षेत्र में अतिक्रमण हटाकर 15 मई तक बैरिकेडिंग पूरा करने, पुलिस पिकेट निर्माण कराने तथा पूरे एयरपोर्ट क्षेत्र में 15 जून तक सीसीटीवी अधिष्ठापन का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

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    रनवे से 75 मीटर तक झाड़ियों की कटाई और ग्रेडिंग कार्य को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया। सतनपुर पहाड़ी पर ऑब्स्ट्रक्शन लाइट लगाने की समयसीमा 7 मई तय की गई है।

    इसके अलावा बम थ्रेट कंटिजेंसी प्लान, बीसीएएस सुरक्षा मंजूरी, डीजीसीए लाइसेंस, एएआई एवं बीएसएल के बीच एमओयू नवीनीकरण तथा नक्शा संशोधन जैसे तकनीकी कार्यों को माहांत तक पूरा करने को कहा गया।

    बीएसएल के प्रतिनिधि ए.के. तिवारी और एएआई रांची के उप महाप्रबंधक मनोज कुमार ने कार्य प्रगति की जानकारी दी, लेकिन कार्यों की लंबी सूची यह भी दर्शाती है कि अब तक मूलभूत तैयारियां ही अधूरी हैं।

    सीटीओ पर अटका मामला, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर सवाल

    एयरपोर्ट संचालन में सबसे बड़ी बाधा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) की अनुमति बनी हुई है। यह फाइल पिछले तीन वर्षों से लंबित बताई जा रही है, जिस पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है।

    बैठक में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया और संबंधित अधिकारियों को समन्वय स्थापित कर शीघ्र अनुमति प्राप्त करने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि सीटीओ के अभाव में अन्य तैयारियां पूरी होने के बावजूद संचालन शुरू नहीं किया जा सकता।

    इस पर उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि संबंधित विभाग प्राथमिकता के आधार पर इस प्रक्रिया को पूरा कराएं, ताकि एयरपोर्ट संचालन में और विलंब न हो।

    दो साल का काम आठ वर्ष में भी अधूरा

    बैठक में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए। जिन कार्यों को सामान्यतः दो वर्षों में पूरा किया जाना चाहिए था, वे आठ वर्षों के बाद भी अधूरे हैं। एएआई और बीएसएल के बीच एमओयू नवीनीकरण लंबित है, नक्शों में संशोधन अब तक जारी है और कई तकनीकी स्वीकृतियां भी पूरी नहीं हो सकी हैं।

    एएआई रांची के उप महाप्रबंधक मनोज कुमार कई बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिससे लापरवाही उजागर हुई। यह भी सवाल उठा कि जब एएआई खुद को विशेषज्ञ संस्था बताती है तो सभी कार्यों का टेंडर एक साथ क्यों नहीं किया गया।

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    अनुभवहीन अधिकारियों को इतने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी देने से काम की गति और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुई है। यदि अधिकांश कार्य पूरे होने का दावा किया जा रहा है, तो डीजीसीए की आपत्तियां अब तक दूर क्यों नहीं हुईं-यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।