बोकारो कोर्ट का अहम फैसला: जमीन-मकान के लिए ली गई राशि उत्तराधिकारियों को ब्याज समेत लौटानी होगी
Bokaro Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में केके विजन के प्रोपराइटर स्वर्गीय कृष्ण सिंह के उत्तराधिकारियों को वादिनी मधु जैन ...और पढ़ें

बोकारो व्यवहार न्यायालय। (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
बोकारो कोर्ट ने जमीन-मकान राशि वापसी पर सुनाया फैसला।
उत्तराधिकारियों को 6% ब्याज सहित राशि लौटाने का आदेश।
वसूली स्वर्गीय प्रोपराइटर की छोड़ी गई संपत्ति से ही होगी।
जागरण संवाददाता, बोकारो। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह सिविल जज (सीनियर डिवीजन) प्रथम अनुज कुमार की अदालत ने जमीन और मकान से संबंधित राशि वापसी के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने केके विजन के प्रोपराइटर स्वर्गीय कृष्ण सिंह उर्फ केके सिंह के उत्तराधिकारियों को वादिनी मधु जैन की बकाया राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि राशि की वसूली स्वर्गीय कृष्ण सिंह द्वारा छोड़ी गई संपत्ति से ही की जाएगी। उत्तराधिकारियों ने यदि अपनी व्यक्तिगत आमदनी से कोई संपत्ति अर्जित की है तो उसे इस राशि की वसूली के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। मामला मुद्रावाद संख्या 41/2014 से संबंधित है।
मधु जैन ने अदालत में वाद दायर कर बताया था कि वह अपने पति के साथ केके विजन के प्रोपराइटर कृष्ण सिंह उर्फ केके सिंह के राजेंद्र नगर हाउसिंग कालोनी स्थित कृष्ण एनक्लेव में घर सहित मकान लेने के लिए गई थीं। मकान का निर्माण कराकर देने के लिए उन्होंने कृष्ण सिंह को 31 लाख पचास हजार रुपये दिए थे।
इसके बाद 25 नवंबर 2011 को 13.05 डिसमिल जमीन उनके नाम हस्तांतरण की गई थी। जमीन पर मकान के रूप में ए टाइप-बंगला बनाकर देने की बात थी। इसी बीच केके विजन के प्रोपराइटर कृष्ण सिंह का निधन हो गया और मकान निर्माण का काम पूरा नहीं हो सका।
इसके बाद मधु जैन के पति की ओर से मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया। वर्ष 2014 में मधु जैन ने राशि की वापसी के लिए मुद्रा वाद दायर किया। मामले में नोटिस जारी होने के बाद स्वर्गीय कृष्ण सिंह के उत्तराधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। उत्तराधिकारियों की ओर से तर्क दिया गया कि कृष्ण सिंह की मृत्यु के साथ उनकी फर्म भी समाप्त हो गई थी।
ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों पर वादिनी की राशि लौटाने की हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं बनती है।
अदालत ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और मौखिक साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया।
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न्यायालय ने हिंदू उत्तराधिकार संशोधित अधिनियम के प्रावधानों पर विचार करने के बाद माना कि कृष्ण सिंह द्वारा छोड़ी गई संपत्ति के उत्तराधिकारी और प्रतिनिधि होने के कारण उत्तराधिकारियों पर उस संपत्ति से संबंधित देनदारी पूरी करने की जिम्मेदारी बनती है।
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इस मामले में कोई एकरारनामा नहीं निष्पादित हुआ था। अदालत के समक्ष वादिनी ने कृष्ण सिंह को राशि दिए जाने की रसीद भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की। न्यायालय ने पाया कि रसीद में राशि प्राप्त करने के साथ जमीन और मकान से संबंधित शर्तों का उल्लेख है। अदालत ने इसे संविदा अधिनियम के तहत पूर्ण एवं कार्यान्वित संविदा के रूप में स्वीकार किया।
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न्यायालय ने वादिनी मधु जैन के पक्ष में आंशिक रूप से डिक्री पारित करते हुए वाद दायर करने की तिथि से वास्तविक राशि प्राप्त होने की तिथि तक छह प्रतिशत ब्याज के साथ बकाया रकम का भुगतान करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि भुगतान कृष्ण सिंह द्वारा छोड़ी गई संपत्ति से उनके उत्तराधिकारी करेंगे। वादी का पक्ष अदालत में अधिवक्ता एस एम एस रहमान ने रखा।
