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कर्मचारियों की संख्या घटा रही SAIL, लेकिन CISF के डॉग स्क्वाड और सुरक्षा पर भारी खर्च

Published: Sat, 29 Aug 2026 05:16 PM (IST)

SAIL बोकारो इस्पात संयंत्र में लागत नियंत्रण के लिए सीआईएसएफ, होमगार्ड और जिला पुलिस पर होने वाले भारी खर्च को कम करने का रोडमैप तैयार किया गया है।

SAIL में लागत नियंत्रण के लिए श्रमिकों की संख्या को किया जा रहा कम। (प्रतीकात्मक फोटो)

SAIL में लागत नियंत्रण के लिए श्रमिकों की संख्या को किया जा रहा कम। (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. सीआईएसएफ डॉग स्क्वाड पर लाखों का खर्च कम होगा।

  2. जिला पुलिस को दिए गए वाहनों की संख्या आधी होगी।

  3. दूसरे जिलों के होमगार्ड की जगह स्थानीय जवानों को प्राथमिकता।

जागरण संवाददाता, बोकारो। स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में लागत नियंत्रण के लिए अधिकारी, कर्मचारी व ठेका श्रमिकों की संख्या को कम किया जा रहा है। इसके लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, मेडिकल अनफिट जैसी आदि योजना धरातल पर उतारी जा रही है। जिससे कामगारों की संख्या को घटाकर कंपनी के खजाने की बचत की जाएगी।

वहीं, बोकारो इस्पात संयंत्र सहित सेल के विभिन्न इकाई में कंपनी प्रबंधन के खजाने का एक बड़ा भाग सीआइएसएफ, होमगार्ड तथा जिला पुलिस के ऊपर खर्च हो रहा है। इनमें सीआइएसएफ का डॉग स्कवाड यानी श्वान दस्ता भी शामिल है। सेल प्रबंधन इन खोजी कुत्तों के रख रखाव से लेकर इनके खाने पीने के लिए प्रतिमाह लाखों रुपये खर्च कर रहा है।

पांच खोजी कुत्तों पर महीने में एक लाख खर्च

दूसरी तरफ, संयंत्र में आठ से दस घंटे की कड़ी ड्यूटी करने वाले ठेका श्रमिकों को सीआइएसएफ के श्वान दस्ता से कम वेतन दिया जा रहा है।

सिर्फ बोकारो इस्पात संयंत्र की बात करें तो यहां सीआइएसएफ के लगभग पांच खोजी कुत्ते है, जिनके रख रखाव पर बीएसएल प्रबंधन का लगभग एक लाख रुपये से ज्यादा महीने का खर्च है। जबकि यहां इतनी संख्या में खोजी कुत्तों की उपयोगिता नही के बराबर है। 

बीएसएल के खजाने से चल रहे जिला पुलिस के वाहन

सेल प्रबंधन के खजाने का एक बड़ा हिस्सा जिला पुलिस के ऊपर खर्च हो रहा है। बीएसएल की ओर से यहां एसपी पुल में कुल 32 चार पहिया वाहन दिए गए है। जहां प्रति वाहन पर 70 हजार रुपये का खर्च सेल प्रबंधन अपने खजाने से वहन कर रहा  है।

जबकि राज्य सरकार की ओर से बोकारो के सभी थानों को आधुनिक तकनीक से लैस नए दो और चार पहिया वाहन दिए जा चुके हैं। ताज्जुब की बात तो यह है कि सेल प्रबंधन अपने शहरी क्षेत्र में पेट्रोलिंग की व्यवस्था को चुस्त दुरूस्त रखने के लिए पुलिस प्रशासन को वाहन दिए थे, लेकिन इनमें कई वाहनों का इस्तेमाल नगरपालिका क्षेत्र के थानों में भी किया जा रहा है।

चार जिलों के होमगार्ड का वेतन बीएसएल के जिम्मे

बीएसएल की ड्यूटी में तैनात कुल चार जिलों के होमगार्ड जवानों का वेतन कंपनी के खजाने को और प्रभावित कर रहा है।

बोकारो इस्पात संयंत्र के बीजीएच, नगर सेवा विभाग, सिक्योरिटी विभाग तथा अन्य कार्यालयों में बोकारो, धनबाद, गिरिडीह तथा दुमका जिले के होमगार्ड जवान अपनी ड्यूटी कर रहे है।

जबकि यहां इतनी संख्या में गृह रक्षक की कोई आवश्यकता नही है। बीएसएल के इन स्थानों में निजी सुरक्षा एजेंसी से कम वेतन में बेहतर काम काज लिया जा सकता है।

नई तकनीक से सुरक्षा पर फोकस

सेल मुख्यालय ने बोकारो इस्पात संयंत्र सहित अपने विभिन्न इकाई में अब नई तकनीक के इस्तेमाल के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मुकम्मल करने का रोड मैप तैयार किया है। इसी क्रम में सेल के सभी महत्वपूर्ण इकाई में सीआइएसएफ की संख्या को उनके वर्तमान संख्या से दो तिहाई कम करने के साथ यहां युवा जवानों को ड्यूटी पर रखने के लिए विचार किया गया है।

जबकि सेल के अलग अलग इकाई में सीआइएसएफ के खोजी कुत्तों के ऊपर होने वाले खर्च की सीमा को भी कम किया जाएगा। इसी प्रकार बोकारो एसपी पुल में दिए गए वाहनों की संख्या में सीधे तौर पर कटौती कर इसे आधी की जाएगी।

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चूंकि जिला पुलिस के पास अब स्वयं का वाहन काफी संख्या में उपलब्ध हो गया है। इसलिए सेल प्रबंधन जिला पुलिस से अपने वाहन को वापस लेकर इसे विभागीय काम काज के लिए इस्तेमाल करेगी।

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इसी प्रकार बीएसएल की ड्यूटी में दूसरे जिलों के होमगार्ड के बजाए बोकारो जिला के होमगार्ड से काम काज लिया जाएगा। सेल प्रबंधन लागत नियंत्रण के इस रोड मैप के जरिए प्रतिमाह 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का बचत करने की तैयारी में जुट गई है।

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