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    बोकारो और आसपास के इलाकों को मिलेगी निर्बाध बिजली, सिलफोर में ₹200 करोड़ से बन रहा नया पावर ग्रिड

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 01:06 PM (IST)

    सिलफोर में 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से एक अत्याधुनिक पावर ग्रिड का निर्माण शुरू हो रहा है, जिससे चास और आसपास के इलाकों की बिजली व्यवस्था में स ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सिलफोर में 200 करोड़ से अधिक का नया पावर ग्रिड।

    2. चास समेत कई सब-स्टेशनों को मिलेगी बेहतर बिजली आपूर्ति।

    3. डीवीसी पर निर्भरता घटेगी, निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

    अरविंद, बोकारो। चास, चीरा चास समेत आस-पास के इलाकों की बिजली व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आने वाला है। सिलफोर में अत्याधुनिक पावर ग्रिड के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

    यह ग्रिड लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनेगा और चास के साथ-साथ फुदनीडीह, बारी को-आपरेटिव, नारायणपुर, मामरकुदर और कालापत्थर जैसे कई सब-स्टेशनों की बिजली आपूर्ति को मजबूत करेगा।

    परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र की बिजली आपूर्ति में व्यापक सुधार की उम्मीद है। जिला प्रशासन ने इस परियोजना के लिए सिलफोर में लगभग 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है।

    उपायुक्त अजय नाथ झा की पहल पर भूमि चिह्नित कर विद्युत विभाग को सौंपे जाने की तैयारी है। भूमि हस्तांतरण और अन्य औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं। सरकार ने टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है।

    विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा और लगभग दो वर्षों में ग्रिड से बिजली आपूर्ति प्रारंभ करने का लक्ष्य है। वर्तमान में चास, फुदनीडीह और आसपास के कई सब-स्टेशनों को बरमसिया और जैनामोड़ पावर ग्रिड के अलावा डीवीसी से बिजली मिलती है।

    डीवीसी चंद्रपुरा के साथ-साथ जैनामोड़ और बरमसीया पावर ग्रिडों से बिजली लंबी दूरी तय कर पहुंचती है। तकनीकी खराबी या उपकरणों में फाल्ट आने पर बड़ी आबादी की बिजली प्रभावित होती है, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    सिलफोर में बनने वाला नया पावर ग्रिड इस समस्या का स्थायी समाधान माना जा रहा है। चास सब-स्टेशन से इसकी दूरी केवल 13 किलोमीटर होगी, जबकि पहले कुमारगदा क्षेत्र में ग्रिड बनाने की योजना थी, जो 23 से 25 किलोमीटर दूर था। कम दूरी से बिजली आपूर्ति का मार्ग छोटा होगा। तकनीकी खराबी की स्थिति में मरम्मत कार्य तेजी से किया जा सकेगा।

    विद्युत विभाग का अनुमान है कि नए ग्रिड के चालू होने के बाद चास सब-स्टेशन की डीवीसी पर लगभग 90 प्रतिशत निर्भरता समाप्त हो जाएगी। इससे चास शहर और आसपास के क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में चास और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय विस्तार तेजी से होगा। ऐसे में बिजली की मांग भी लगातार बढ़ेगी। सिलफोर पावर ग्रिड भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

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    इसके शुरू होने के बाद बार-बार ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज, ओवरलोडिंग और लंबे समय तक बिजली बाधित रहने जैसी समस्याओं में बड़ी कमी आने की उम्मीद है। इससे लाखों उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में यह परियोजना मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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    इस परियोजना के लिए आईटीआई मोड़ के पास भूमि नहीं मिल सकी। इसके बाद कुमारगदा में भूमि चिह्नित हुई, लेकिन दूरी अधिक होने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी। सिलफोर में दस एकड़ जमीन मिली है। जहां अब परियोजना की शुरूआत करने के लिए कागजी कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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    शैलेंद्र भूषण तिवारी, कार्यपालक अभियंता विद्युत प्रमंडल चास।