झारखंड एंबुलेंस हादसा: कौन थे विमान में सवार सभी सात लोग? शव अस्पताल पहुंचते ही मची चीख-पुकार
चतरा में एयर एंबुलेंस हादसे में जान गंवाने वाले सातों लोगों के शव सदर अस्पताल पहुंचे। पोस्टमार्टम की तैयारी चल रही है, जिसके लिए मेडिकल टीम गठित की गई ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, चतरा। सोमवार की रात हुए एयर एंबुलेंस हादसे में जान गंवाने वाले सभी सात लोगों के शव मंगलवार सुबह सदर अस्पताल पहुंचते ही पूरे परिसर में मातम छा गया।
पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल टीम का गठन कर दिया गया है और प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी की मौजूदगी में सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
अस्पताल परिसर में मृतकों के स्वजनों के पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी पहुंचे हुए हैं। जनप्रतिनिधियों ने भी अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया और हर संभव सहायता का भरोसा दिया।

हादसे में पायलट, सह-पायलट, चिकित्सक, मेडिकल कर्मी, मरीज और उसकी पत्नी सहित कुल सात लोगों की मौत हुई है।मृतकों में डॉक्टर विकास कुमार शामिल हैं, जो औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मैनका गांव के रहने वाले थे।उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा चतरा में ही हुई थी, जिससे स्थानीय लोगों में शोक की लहर और गहरी हो गई है।
शार्ट सर्किट में झुलसने के बाद ले जाया जा रहा था दिल्ली
मृतकों में संजय कुमार, उनकी पत्नी अर्चना कुमारी और भतीजा ध्रुव कुमार का नाम भी शामिल है। संजय कुमार मूल रूप से लातेहार जिले के चंदवा के निवासी थे और डाल्टनगंज के सतबरवा में होटल चलाते थे।
16 फरवरी को शॉर्ट सर्किट की घटना में 65 प्रतिशत झुलसने के बाद उनका इलाज रांची के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। हालत गंभीर होने पर उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही यह दर्दनाक हादसा हो गया।
उनकी पत्नी अर्चना कुमारी का मायका चतरा सदर प्रखंड के बरैनी गांव में है। वर्ष 2008 में दोनों की शादी हुई थी और उनके दो छोटे बच्चे हैं, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ गया।
बर्बाद हुए खुशहाल परिवार
हादसे में कैप्टन विवेक विकास भगत और को-पायलट सवरदीप सिंह की भी मौत हो गई। कैप्टन भगत लातेहार जिले के डीहीमुरप गांव के रहने वाले थे और उनके पिता देव सहाय भगत चतरा में ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित हैं।
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इस हादसे में डॉक्टर विकास कुमार की भी मौत हुई है। वह औरंगाबाद के बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के मैनका गांव के निवासी थे और रांची सदर अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के तौर पर कार्यरत थे। उनकी पत्नी एसबीआई की कचहरी शाखा में कार्यरत हैं। उनका एक 8 साल का बेटा है, जिसके सिर से पिता का साया उठ गया।
मात्र 24 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
एयर एम्बुलेंस विमान हादसे में जान गंवाने वाले मेडिकल कर्मी सचिन कुमार मिश्रा की उम्र मात्र 24 साल की थी। वह सिवान जिले के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र में भांटी गांव के निवासी थे। सचिन के पिता जितेंद्र मिश्रा का निधन करीब 15 वर्ष पूर्व हो चुका है। वह चार भाइयों और एक बहन में तीसरे नंबर पर थे।
मूल रूप से हुसैनगंज थाना क्षेत्र के टेलकथू गांव के निवासी सचिन का पालन-पोषण ननिहाल, भांटी गांव में हुआ था। यहीं उनकी पढ़ाई-लिखाई भी पूरी हुई।
सदर अस्पताल में मची चीख पुकार
सदर अस्पताल में शव पहुंचते ही चारों ओर करुण क्रंदन का माहौल बन गया। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। हर किसी की जुबान पर बस यही सवाल है कि आखिर एक जीवन बचाने की कोशिश में इतना बड़ा हादसा कैसे हो गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जताया शोक
X पर एक पोस्ट में, पूर्व मुख्यमंत्री और BJP नेता चंपई सोरेन ने कहा कि वह क्रैश की खबर से बहुत दुखी हैं। उन्होंने पोस्ट किया, "मैं मारे गए लोगों के लिए प्रार्थना करता हूं, जिसमें मारंग बुरु (आदिवासी देवता) के प्लेन में सवार क्रू मेंबर भी शामिल हैं, और इस मुश्किल समय में उनके परिवारों को हिम्मत मिले।"