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    चतरा मुखिया हत्याकांड: 8 साल बाद आरजू खान दोषी करार, अब सजा का इंतजार

    By ZULQAR NAINEdited By: Shashank Baranwal
    Updated: Sat, 01 Aug 2026 07:30 AM (IST)

    चतरा में 2018 के मुखिया चंद्रिका यादव हत्याकांड में आरोपी आरजू खान को दोषी करार दिया गया है। न्यायालय ने उसकी जमानत रद्द कर न्यायिक हिरासत में भेज दिय ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर

    सांकेतिक तस्वीर

    HighLights

    1. 2018 मुखिया चंद्रिका यादव हत्याकांड में आरजू खान दोषी करार।

    2. न्यायालय ने जमानत रद्द कर न्यायिक हिरासत में भेजा।

    3. सजा के बिंदु पर सुनवाई अगली तिथि को निर्धारित।

    जागरण संवाददाता, चतरा। वर्ष 2018 में प्रतापपुर प्रखंड के गजवा पंचायत के तत्कालीन मुखिया चंद्रिका यादव की हत्या के चर्चित मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

    साक्ष्यों के आधार पर आरोपी आरजू खान को दोषी करार देते हुए उसकी जमानत रद्द कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए अगली तिथि निर्धारित की गई है।

    जानकारी के अनुसार, 20 जनवरी 2018 को प्रतापपुर थाना क्षेत्र के ससगड़ा रोड पर गजवा पंचायत के तत्कालीन मुखिया चंद्रिका यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

    इस मामले में वर्तमान स्थानीय विधायक जनार्दन पासवान, कपिल पासवान, सत्येंद्र पासवान, अर्जुन पासवान, आरजू खान, जुबैर खान, शेख मेराज, खालिद खान, मुन्ना खान, रुस्तम खान, अशोक यादव, बीरेंद्र साव सहित अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था।

    मामले में अप्राथमिकी अभियुक्त इरफान खान तथा प्राथमिकी अभियुक्त आरजू खान का विचारण पूरा हो चुका है। न्यायालय ने उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरजू खान के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को सिद्ध माना।

    इसके बाद उसकी जमानत निरस्त करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक अमित श्रीवास्तव ने न्यायालय में पक्ष रखा। जबकि आरोपी आरजू खान की ओर से गया (बिहार) के अधिवक्ता शहनवाज खान ने बहस की।

    इस मामले में अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्यों के अतिरिक्त कुल 26 गवाहों की गवाही कराई। वहीं, अन्य आरोपितों- जनार्दन पासवान, कपिल पासवान, सत्येन्द्र पासवान, अर्जुन पासवान, जुबैर खान, शेख मेराज, खालिद खान, मुन्ना खान, रुस्तम खान, अशोक यादव एवं बीरेन्द्र साव- के विरुद्ध न्यायालय में विचारण अभी लंबित है।

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