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    चतरा में जल्द साकार होगा कौलेश्वरी रोपवे का सपना, प्रशासन ने तेज की प्रक्रिया; सरकार की मंजूरी का इंतजार

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 06:11 PM (IST)

    चतरा में कौलेश्वरी पर्वत रोपवे परियोजना को लेकर प्रशासन ने प्रक्रिया तेज कर दी है। उपायुक्त रवि आनंद की पहल पर राइट्स को पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार कर ...और पढ़ें

    हंटरगंज प्रखंड में स्थित कौलेश्वरी पर्वत।

    हंटरगंज प्रखंड में स्थित कौलेश्वरी पर्वत।

    HighLights

    1. उपायुक्त रवि आनंद की पहल से रोपवे परियोजना में तेजी।

    2. राइट्स को पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार करने का पत्र भेजा गया।

    3. कौलेश्वरी धाम में श्रद्धालुओं की यात्रा होगी अब आसान।

    जुलकर नैन, चतरा। लंबे समय से लंबित कौलेश्वरी पर्वत रोपवे परियोजना को लेकर एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है। उपायुक्त रवि आनंद की पहल पर संबंधित एजेंसी राइट्स को पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार करने के लिए पत्र लिखा गया है।

    इससे पूर्व पर्यटन निदेशालय को आवश्यक भूमि से संबंधित प्रतिवेदन भेज दिया गया है। इसके साथ ही परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रशासनिक प्रक्रिया तेज होने की संभावना बढ़ गई है। यदि सरकार से अंतिम स्वीकृति मिलती है, तो कौलेश्वरी धाम तक श्रद्धालुओं की यात्रा पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगी।

    पर्यटन निदेशालय ने वर्ष 2024 में उपायुक्त को पत्र भेजकर कौलेश्वरी मंदिर में रोपवे निर्माण के लिए आवश्यक भूमि का चिन्हीकरण कर विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

    निदेशालय ने अपने पत्र में बताया था कि सरकार ने परियोजना की व्यवहार्यता जांच (फिजिबिलिटी स्टडी) एजेंसी राइट्स से कराई थी, जिसमें कौलेश्वरी रोपवे निर्माण को तकनीकी रूप से व्यवहार्य पाया गया है। फिजिबिलिटी स्टडी के अनुसार प्रस्तावित रोपवे की लंबाई लगभग 1200 मीटर होगी। इसके लिए करीब 13,075 वर्गमीटर भूमि की आवश्यकता बताई गई है।

    इसके अलावा रोपवे स्टेशन, पार्किंग, शॉपिंग कियोस्क तथा अन्य पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए अतिरिक्त भूमि भी चिन्हित की जानी है। पर्यटन निदेशालय द्वारा पूर्व में कई बार भूमि प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।

    तत्कालीन उपायुक्त के निर्देश पर संबंधित अंचल कार्यालय द्वारा कौलेश्वरी पहाड़ क्षेत्र में भूमि का सीमांकन कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया गया था। जिसमें संबंधित खाता, प्लॉट, रकबा तथा भूमि की प्रकृति का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट पर्यटन निदेशालय को भेज दी गई थी।

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    उपायुक्त रवि आनंद का प्रयास है कि लंबित इस परियोजना को अंजाम तक पहुंचा दिया जाए। कौलेश्वरी पर्वत झारखंड एवं बिहार की सीमा से जुड़े प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु माता कौलेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उसमें सात से आठ हजार विदेशी होते हैं।

    हालांकि ऊंची पहाड़ी पर चढ़ाई होने के कारण बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और छोटे बच्चों के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। रोपवे बनने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।

    पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि रोपवे परियोजना के धरातल पर उतरने से कौलेश्वरी धाम राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक पहचान बनाएगा। इससे होटल, परिवहन, स्थानीय दुकानों, हस्तशिल्प और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    जिला प्रशासन और स्थानीय लोगों को अब राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी और परियोजना के क्रियान्वयन की शुरुआत का इंतजार है। यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हुईं तो वर्षों से लंबित कौलेश्वरी रोपवे का सपना जल्द साकार हो सकता है।

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    कौलेश्वरी पर्वत पर रोपवे निर्माण के लिए प्रशासनिक प्रयास तेज कर दिया गया है। इस संबंध में हाल के दिनों में रोपवे निर्माण के प्राक्कलन पुनरीक्षित करने के लिए संबंधित एजेंसी राइट्स को पत्र लिखा गया है। जमीन संबंधित दस्तावेज पहले ही पर्यटन निदेशालय को भेजा जा चुका है। हाल के दिनों में पर्यटन सचिव का आगमन होना है, उनके साथ भी इस पर चर्चा होगी।

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    रवि आनंद, डीसी, चतरा।