भीषण गर्मी के बीच नौतपा की दस्तक: 2 जून तक बरसेगी आग और चलेगी तेज लू; किसानों को मानसून की आस
नौतपा 25 मई से 2 जून तक रहेगा, जिसमें भीषण गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ेगा। यह अवधि किसानों के लिए मानसून की उम्मीदें जगाती है, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
नौतपा 25 मई से 2 जून तक प्रभावी रहेगा।
भीषण गर्मी, लू और उमस बढ़ने की संभावना।
किसानों को अच्छी बारिश और मानसून की उम्मीद।
अजीत पाण्डेय, प्रतापपुर (चतरा)। भीषण गर्मी की मार झेल रहे लोगों के लिए आने वाले दिन और अधिक चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
हिंदू पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष नौतपा की शुरुआत 25 मई से होगी, जो 2 जून तक प्रभावी रहेगा। भारतीय परंपरा में इन नौ दिनों को साल का सबसे अधिक तपिश भरा दौर माना जाता है।
मान्यता है कि इस दौरान सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, जिससे उनकी किरणें पृथ्वी पर अधिक सीधी और प्रखर रूप से पड़ती हैं। इसका असर तापमान में तेज बढ़ोतरी, लू के थपेड़ों और वातावरण में बढ़ती उमस के रूप में देखने को मिलता है।
मौसम जानकारों के अनुसार नौतपा के दौरान दोपहर की धूप बेहद तीखी हो सकती है। गर्म हवाएं लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करेंगी और तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है।
11 बजे से 4 बजे तक घर से ना निकलें बाहर
खासकर दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। चिकित्सकों ने बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में पानी की कमी, चक्कर, थकान और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं इस दौरान तेजी से बढ़ सकती हैं। ऐसे में पर्याप्त पानी पीना, हल्का एवं सुपाच्य भोजन करना, सिर ढंककर बाहर निकलना और धूप से बचाव बेहद जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नौतपा को केवल गर्मी का दौर नहीं, बल्कि कृषि और मानसून से जुड़ी उम्मीदों का संकेत भी माना जाता है। किसानों का मानना है कि यदि नौतपा के दौरान धरती खूब तपती है तो वातावरण में आवश्यक परिवर्तन होता है, जिससे मानसून सक्रिय और अच्छी वर्षा की संभावना मजबूत होती है। यही वजह है कि गांवों में लोग इन नौ दिनों की गर्मी को आने वाली बारिश और खेती की स्थिति से जोड़कर देखते हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा प्रकृति के संतुलन और मौसम चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तेज गर्मी से समुद्री क्षेत्रों में दबाव परिवर्तन होता है, जो मानसूनी हवाओं को गति देने में सहायक माना जाता है।
इसलिए जहां एक ओर आम जनजीवन गर्मी से प्रभावित होता है, वहीं दूसरी ओर किसान अच्छी बारिश की उम्मीद में इस तपिश को शुभ संकेत के रूप में भी देखते हैं।
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नौतपा केवल मौसम परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का महत्वपूर्ण चरण है। रोहिणी नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश अग्नि तत्व को प्रबल करता है। यदि नौतपा के दौरान अच्छी गर्मी पड़ती है तो इसे कृषि और मानसून दोनों के लिए शुभ माना जाता है। लोगों को इस अवधि में स्वास्थ्य के प्रति विशेष सजग रहना चाहिए और प्रकृति के नियमों के अनुरूप दिनचर्या अपनानी चाहिए।
नलिनी कान्त शर्मा, प्रतापपुर चतरा