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झारखंड में हार्ड पिच पर भाजपा कैसे खेलें? अमित शाह ने कोर कमेटी को समझाया सियासी गेमप्लान

Published: Thu, 20 Aug 2026 08:02 AM (IST)Updated: Thu, 20 Aug 2026 10:07 AM (IST)

‍‍BJP Politics: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में झारखंड भाजपा नेताओं से मुलाकात कर राज्य की राजनीतिक स्थिति ...और पढ़ें

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात  करते झारखंड भाजपा के नेता। (फोटो सौजन्य)

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करते झारखंड भाजपा के नेता। (फोटो सौजन्य)

HighLights

  1. अमित शाह ने झारखंड भाजपा नेताओं से दिल्ली में की मुलाकात।

  2. सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ आ क्रामक राजनीति करने का निर्देश दिया।

  3. छात्र आंदोलन, एमएमडीआर बिल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

मृत्युंजय पाठक, धनबाद। Jharkhand BJP Politics: झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी की नौकरियों में कथित घोटाले को लेकर छात्र आंदोलन और केंद्र सरकार द्वारा एमएमडीआर बिल में किए गए संशोधन के विरोध में सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा के विरोध के बीच Union Home Minister Amit Shah ने बुधवार को नई दिल्ली में झारखंड भाजपा के नेताओं के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक को झारखंड भाजपा के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक में राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति को लेकर विचार-विमर्श हुआ। गृह मंत्री ने प्रदेश भाजपा नेताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन दिया। उन्होंने सत्ताधारी झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन के खिलाफ आक्रामक राजनीति पर जोर दिया। 

अमित शाह से मिले झारखंड भाजपा के टॉप-8 नेता

सूत्रों के अनुसार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रो. आदित्य साहू ने मिलने वाले नेताओं की सूची में 24 नाम भेजे थे। इनमें से अमित शाह ने आठ नेताओं के नाम को स्वीकृति दी। इनमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपाई सोरेन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय, दीपक प्रकाश और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह शामिल थे।

बैठक में किन-किन विषयों पर हुई चर्चा

बैठक में चर्चा के विषयों के बाबत झारखंड भाजपा की ओर से जारी प्रेस बयान में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। बयान में सिर्फ इतना कहा गया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में झारखंड भाजपा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।

इस दौरान झारखंड के कई समसामयिक विषयों पर गृह मंत्री से सार्थक चर्चा हुई। गृह मंत्री की ओर से भाजपा नेताओं को कई आवश्यक निर्देश और मार्गदर्शन दिए गए।

डिफेंसिव नहीं आक्रामक राजनीति पर जोर

सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने भाजपा नेताओं को डिफेंसिव राजनीति के बजाय आक्रामक राजनीति करने पर जोर दिया। बैठक में छात्र आंदोलन, एमएमडीआर कानून में संशोधन, प्रस्तावित एफसीआरए बिल और एसआईआर समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। भाजपा नेताओं को निर्देश दिया गया कि वे एमएमडीआर कानून में संशोधन को लेकर जनता के बीच जाकर पार्टी का पक्ष रखें।

लोगों को बताया जाए कि यह संशोधन झारखंड या झारखंडी जनता के विरोध में नहीं है, बल्कि राज्य और देशहित में है। इस मुद्दे पर झामुमो के विरोध का तथ्यात्मक तरीके से जवाब देने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी भाजपा को आक्रामक रुख अपनाने का सुझाव दिया गया। नेताओं से कहा गया कि वे छात्रों की समस्याओं को मजबूती से उठाएं और सरकार को घेरें।

बैठक में प्रस्तावित एफसीआरए बिल के प्रभाव से भी जनता को अवगत कराने पर चर्चा हुई। विदेशों से होने वाली फंडिंग को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में यह बिल पेश किया था। हालांकि, बिल संसद से पारित नहीं हो सका और फिलहाल संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति के विचारार्थ भेजा गया है।

एसआईआर के मुद्दे पर भी भाजपा नेताओं को विपक्ष के संभावित आंदोलन और बयानबाजी का तथ्यात्मक तरीके से जवाब देने को कहा गया। इसके साथ ही घुसपैठ के मुद्दे पर झारखंड में भाजपा को लगातार आक्रामक रहने का संदेश दिया गया।

संसद और विधानसभाओ‍ं में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर भी अपनी बात मजबूती से जनता के बीच रखने को कहा गया।

झारखंड में कांग्रेस परिसीमन को लेकर मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। यह प्रचार किया जा रहा है कि परिसीमन से आदिवासियों को नुकसान होगा। उनकी सीटें घट जाएगी।

झारखंड भाजपा के लिए क्यों अहम है अमित शाह की बैठक

राजनीतिक रूप से झारखंड भाजपा के लिए यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। पूर्वी और मध्य भारत के इस हिस्से में झारखंड भाजपा के लिए सबसे कठिन राजनीतिक मोर्चों में से एक बना हुआ है।

झारखंड को छोड़कर इसके आसपास के बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में भाजपा या उसके नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकारें हैं। इसके बावजूद झारखंड में पिछले दो विधानसभा चुनावों से भाजपा सत्ता से बाहर है।

राज्य में भाजपा अब तक हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले झामुमो-कांग्रेस गठबंधन का प्रभावी राजनीतिक काट नहीं निकाल पाई है। यही वजह है कि पार्टी केंद्रीय नेतृत्व अब संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और जनता के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

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सूत्रों के अनुसार, बैठक में भाजपा नेताओं को जनता के मुद्दों पर रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय आक्रामक राजनीति करने का संदेश दिया गया। साथ ही राज्य के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने को कहा गया।

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अमित शाह की ओर से मिले दिशा-निर्देशों के बाद आने वाले दिनों में झारखंड भाजपा के आंदोलन और सरकार को घेरने के कार्यक्रमों में तेजी आने की संभावना है।