भाजपा सांसद ढुल्लू महतो ने अपने ही पार्टी के मेयर को बताया लुटेरा, खुले मंच दी उखाड़ फेंकने की चेतावनी
धनबाद भाजपा में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है, जहां सांसद ढुल्लू महतो और जिलाध्यक्ष श्रवण राय ने महापौर संजीव सिंह और विधायक रागिनी सिंह पर गंभीर आर ...और पढ़ें

भाजपा सांसद ढुल्लू महतो। फाइल फोटो
HighLights
धनबाद सांसद ने महापौर संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए।
जिलाध्यक्ष ने विधायक रागिनी सिंह पर सार्वजनिक निशाना साधा।
नगर निगम चुनाव के बाद भाजपा में गुटबाजी उजागर हुई।
जागरण संवाददाता, धनबाद। धनबाद भाजपा में अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। झारिया विधानसभा क्षेत्र में दो तीन दिन पहले ही में आयोजित पदयात्रा और सांसद सम्मान सभा के मंच से धनबाद सांसद ढुल्लू महतो ने अपनी ही पार्टी की झारिया नेतृत्वकर्ता और धनबाद नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर संजीव सिंह (सिंह मेंशन) पर गंभीर आरोप लगाते हुए खुला मोर्चा खोल दिया।
सांसद ने मंच से दोनों नेताओं को हत्या की राजनीति करने वाला और झारिया की जनता को लूटने वाला बताते हुए आगामी चुनाव में औकात बताने और उखाड़ फेंकने की चेतावनी दी।
संगठन में समन्वय और एकजुटता की जिम्मेदारी वाले जिलाध्यक्ष श्रवण राय भी उसी मंच से सांसद के सुर में सुर मिलाते नजर आए। उन्होंने भी विधायक रागिनी सिंह पर सार्वजनिक रूप से निशाना साधते हुए कई आरोप लगाए।
झारिया में संजीव सिंह के परिवार का दबदबा
महापौर संजीव सिंह भाजपा से झारिया के पूर्व विधायक रह चुके हैं। उनके पिता स्व. सूर्यदेव सिंह लगातार चार बार झारिया से विधायक रहे, चाचा स्व. बच्चा सिंह विधायक और राज्य के नगर विकास मंत्री रहे, जबकि माता कुंती देवी दो बार विधायक रहीं। वर्तमान विधायक रागिनी सिंह संजीव सिंह की पत्नी हैं।
इसी परिवार से इंदु देवी धनबाद नगर निगम की पहली महापौर बनी थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिस परिवार ने वर्षों तक कोयलांचल में भाजपा का आधार मजबूत किया, आज उसी के खिलाफ पार्टी के नेता सार्वजनिक मंचों से बयानबाजी कर रहे हैं।
नगर निगम चुनाव ने खोली गुटबाजी की पोल
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हालिया धनबाद नगर निगम चुनाव में भाजपा की अंदरूनी साजिश और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। भाजपा ने ऐसे प्रत्याशी को समर्थन दिया जिसका न कोई जनाधार था और न राजनीतिक पकड़।
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नतीजा यह रहा कि भाजपा, कांग्रेस और झामुमो समर्थित प्रत्याशी हार गए, जबकि निर्दलीय उतरे संजीव सिंह ने लगभग 1 लाख 34 हजार मतों से भारी जीत दर्ज की।
प्रदेश से केंद्रीय नेतृत्व तक जाएगी बात
भाजपा समर्थक और झारखंड प्रान्तीय मारवाड़ी सम्मेलन के उपाध्यक्ष कृष्णा अग्रवाल का कहना है कि पार्टी अनुशासन के लिए जानी जाती है, लेकिन धनबाद में हालात चिंताजनक हैं। नगर निगम चुनाव के बाद प्रदेश नेतृत्व से आत्ममंथन और समन्वय की उम्मीद थी, लेकिन उलट नेताओं की आपसी खींचतान तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार मामला अब प्रदेश कमेटी से होते हुए केंद्रीय नेतृत्व तक ले जाने की तैयारी है। यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ तो संगठन में इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा और आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।