धनबाद भाजपा में कबीलाई राजनीति चरम पर, कार्यकर्ताओं को नहीं नेताओं को चाहिए प्रशिक्षण
Dhanbad BJP में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के बावजूद गंभीर गुटबाजी सामने आई है। स्थानीय नेताओं के बीच आपसी टकराव और व्यक्तिगत निष्ठा ...और पढ़ें

धनबाद के सांसद ढुलू महतो, झरिया की विधायक रागिनी सिंह, धनबाद के विधायक राज सिन्हा व मेयर संजीव सिंह।
HighLights
धनबाद भाजपा में तीन गुटों के बीच गंभीर टकराव।
कार्यकर्ताओं से अधिक नेताओं को प्रशिक्षण की आवश्यकता।
व्यक्तिगत निष्ठा को विचारधारा से अधिक महत्व।
मृत्युंजय पाठक, धनबाद। भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने कार्यकर्ताओं को वैचारिक रूप से मजबूत, अनुशासित और जनसेवा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान चला रही है। इसी कड़ी में धनबाद महानगर भाजपा का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर 23 और 24 मई को आठ लेन स्थित द रीत में आयोजित होगा। प्रशिक्षण देने के लिए मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार और झारखंड भाजपा के संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह पहुंच रहे हैं।

हालांकि प्रशिक्षण शिविर से पहले धनबाद भाजपा का अंदरूनी माहौल संगठन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। पार्टी के भीतर जिस तरह की गुटबाजी और टकराव चल रहा है, उसने कार्यकर्ताओं का उत्साह फीका कर दिया है। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने तंज कसते हुए कहा-यहां कार्यकर्ताओं को नहीं, नेताओं को प्रशिक्षण की जरूरत है।
धनबाद भाजपा में तीन गुट, संगठन बीच में पिस रहा
धनबाद भाजपा इस समय तीन बड़े गुटों में बंटी दिखाई दे रही है। पहला गुट सांसद ढुलू महतो का, दूसरा झरिया विधायक रागिनी सिंह का और तीसरा धनबाद विधायक राज सिन्हा का माना जा रहा है। तीनों नेता अपने-अपने क्षेत्रों में अलग शक्ति केंद्र बन चुके हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि सांसद ढुलू महतो, राज सिन्हा और रागिनी सिंह के बीच संवाद तक नहीं है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी की विचारधारा से जुड़े पुराने और समर्पित कार्यकर्ता हाशिये पर धकेले जा रहे हैं, जबकि व्यक्तिगत निष्ठा रखने वालों को तरजीह मिल रही है।
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भाजपा की विचारधारा के साथ खड़े कार्यकर्ता किनारे किए जा रहे हैं और जो व्यक्ति के साथ वह मुख्यधारा में है। उसे संगठन में पद से लेकर सांसद-विधायक निधि का ठेका तक मिल रहा है। भाजपा के अंदर बढ़ती इस 'कबीलाई संस्कृति' ने संगठनात्मक अनुशासन पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
विचारधारा पीछे, व्यक्ति पूजा आगे
धनबाद भाजपा में अब विचारधारा की जगह व्यक्ति आधारित राजनीति हावी होती दिख रही है। पार्टी मंचों पर नेता-पार्टी पहले, की बात करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आती है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जो नेता पार्टी की नीति और सिद्धांत के साथ खड़े हैं, उन्हें किनारे किया जा रहा है।
दूसरी ओर नेताओं के निजी समर्थक संगठन में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। भाजपा हमेशा कार्यकर्ता आधारित पार्टी होने का दावा करती रही है, लेकिन धनबाद में-कार्यकर्ता पार्टी की रीढ़ हैं, वाला नारा अब सिर्फ चुनावी भाषणों तक सीमित दिखने लगा है।
लोकसभा और मेयर चुनाव में खुलकर सामने आई बगावत
धनबाद भाजपा का आंतरिक संघर्ष लोकसभा चुनाव 2024 और मेयर चुनाव के दौरान सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है। लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ माहौल बनाने तक की बातें सामने आई थीं। वहीं मेयर चुनाव में झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने पार्टी नेतृत्व की सलाह को भी नजरअंदाज कर दिया था।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि उसी समय पार्टी विरोधी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई हो जाती तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। अब स्थिति यह है कि भाजपा नेता सार्वजनिक मंचों से एक-दूसरे पर हमला बोल रहे हैं और संगठन मूकदर्शक बना हुआ है।
भाजपा नेताओं की जुबानी जंग से संगठन की किरकिरी
धनबाद भाजपा में राजनीतिक मतभेद अब व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच चुके हैं। कोई किसी को 'माफिया' और 'कोयला चोर' कह रहा है तो इंटरनेट मीडिया में समर्थक एक-दूसरे पर अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे हैं। कुछ नेता अपने समर्थकों के जरिए खुद को 'टाइगर' और 'शेर' कहलवा रहे हैं, जबकि विरोधी नेताओं को 'गधा' और 'कुत्ता' जैसे शब्दों से संबोधित किया जा रहा है।
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सबसे चिंताजनक बात यह है कि संगठन को अनुशासन में रखने की जिम्मेदारी जिन नेताओं पर है, वे इस पूरे घटनाक्रम पर प्रभावी हस्तक्षेप करते नजर नहीं आ रहे। इससे कार्यकर्ताओं के बीच निराशा बढ़ रही है।
कार्यकर्ता विचारधारा के प्रति समर्पित
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि धनबाद भाजपा का आम कार्यकर्ता आज भी पार्टी और उसकी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध है। समस्या कार्यकर्ताओं में नहीं, बल्कि नेतृत्व स्तर पर बढ़ते अहंकार और गुटबाजी में है। विश्लेषकों का कहना है कि जो नेता खुद को संगठन से बड़ा मानने लगें, उन पर समय रहते कार्रवाई जरूरी है।
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यदि अनुशासनहीनता पर लगाम नहीं लगी तो धनबाद भाजपा की स्थिति भविष्य में कांग्रेस जैसी गुटीय राजनीति वाली पार्टी से भी खराब हो सकती है। अब देखना यह है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान धनबाद भाजपा को वैचारिक मजबूती देता है या फिर यह आयोजन भी अंदरूनी कलह की भेंट चढ़ जाता है।