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    जंगल से सीधे स्मार्टफोन के रास्ते रसोई तक, धनबाद में रुगड़ा-मशरूम की डिजिटल बिक्री; सावन में डिमांड में तेजी

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 10:27 AM (GMT+05:30)

    धनबाद में सब्जी विक्रेता रोशन कुमार ने रुगड़ा (फुटका) और मशरूम बेचने के लिए आदिवासी व ग्रामीण महिलाओं और ग्राहकों को जोड़ व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। इस ...और पढ़ें

    माल बाजार पहुंचने से पहले व्हाट्सएप पर मिल रही जानकारी, तय हो रहा भाव।

    माल बाजार पहुंचने से पहले व्हाट्सएप पर मिल रही जानकारी, तय हो रहा भाव।

    HighLights

    1. धनबाद में रुगड़ा-मशरूम की बिक्री हुई डिजिटल।

    2. ग्राहक घर बैठे जान रहे उपलब्धता और दाम।

    रवि चौरसिया, धनबाद। डिजिटल इंडिया की बयार अब कोयलांचल धनबाद के लोकल बाजारों को भी हाईटेक बनाने लगी है। कल तक जहां शहर के आस पास के ग्रामीण इलाके से सब्जी बेचने आनेवाली महिलाएं एवं पुरुष आनलाइन पेमेंट लेने से डरते है तो वहीं शहर के कोर्ट मोड़ के समीप पोस्ट आफिस के पास सब्जी बचनेवाले रौशन कुमार ने अपने व्यापार को पूरी तरह डिजिटल मोड में डाल दिया है।

    रौशन के इस पहल से मानसून के मौसम में बाजारों में दिखने वाला स्वादिष्ट रुगड़ा व फुटका और मशरूम अब सड़कों पर ग्राहकों का इंतजार नहीं करती बल्कि डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए सीधे लोगों की रसोई तक पहुंच रहा है।

    जिस कारण अब इस महंगे भाव पर बिकने वाले रुगड़ा के लिए न तो दुकानदारों को ग्राहकों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है और न ही मोलभाव की चिकचिक होती है। माल बाजार पहुंचने से पहले ही ग्राहकों के नोटिफिकेशन के जरिए मोबाइल पर भाव और समय का मैसेज फ्लैश हो जाता है और देखते ही देखते चंद घंटों में सारी टोकरियां खाली हो जाती हैं।

    दरअसल शहर के चतुर कारोबारी ने अपने रुगड़ा को जल्दी से जल्दी बेचने के लिए अपने नियमित ग्राहकों के लिए मोबाइल नंबर से विशेष व्हाट्सएप ग्रुप (सुपर क्वालिटी फुटका एंड टेक्नस) नामक ग्रुप तैयार किया हैं। इस ग्रुप के जुड़े ग्राहकों को घर बैठे यह पता चल जाता है कि आज बाजार में रुगड़ा या मशरूम उपलब्ध होगा या नहीं।

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    चूंकि यह मौसमी उत्पाद हैं और इनकी आवक हर दिन निश्चित नहीं होती इसलिए यह डिजिटल जरिया दुकानदारों और खरीदारों दोनों के लिए मददगार साबित हो रहा है। माल हाथ में आते ही कीमत और दुकान सजने का समय ग्रुप में डाल दिया जाता है जिससे खरीदार सीधे तय समय पर पहुंचते हैं।

    रौशन बताते हैं रुगड़ा और मशरूम मानसून में कुछ ही समय के लिए आता है और यह काफी महंगा होता है। आम दिनों में लोग खरीदने से ज्यादा दाम पूछकर चले जाते थे जिससे समय बर्बाद होता था। अब मैंने पांच दर्जन से अधिक शौकीन ग्राहकों का ग्रुप बनाया है। माल की उपलब्धता और रेट तय होते ही ग्रुप में मैसेज डाल देता हूं।

    डिजिटल होने से काम बेहद आसान

    ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से पैसे लेकर सीधे ठेले पर आते हैं। हमें ग्राहकों का इंतजार नहीं करना पड़ता, बस कुछ ही घंटों में पूरा स्टाक बिक जाता है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में हमें खुद सुबह तक पता नहीं होता कि जंगल से आज कितना रुगड़ा या मशरूम मंडी पहुंचेगा और किस भाव मिलेगा।

    डिजिटल ग्रुप होने से फायदा यह है कि जैसे ही हमें माल मिलता है हम तुरंत ग्राहकों को अपडेट कर देते हैं। डिजिटल होने से हमारा काम बेहद आसान और व्यवस्थित हो गया है।

    वहीं डिजिटल व्यवस्था से कारोबारियों के साथ साथ अब आम ग्राहको को भी राहत मिली है धैया के रहने वाले रुगड़ा के शौकीन विकास कुमार ने बताया कि पहले रुगड़ा या जंगली मशरूम खरीदने के लिए बाजार के चक्कर काटने पड़ते थे।

    कई बार दुकान पर पहुंचने के बाद पता चलता था कि आज माल आया ही नहीं या फिर बहुत महंगा है। अब व्हाट्सएप ग्रुप की वजह से हमें घर बैठे सही कीमत और समय का पता चल जाता है। हम बेवजह की परेशानी से बच जाते हैं।

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