दुमका में खुलेगी राज्य की दूसरी मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट, केंद्र सरकार ने दी हरी झंडी
दुमका के जरमुंडी में झारखंड का दूसरा मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट स्थापित किया जाएगा, जिसे केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
दुमका के जरमुंडी में मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट।
झारखंड का दूसरा ऐसा केंद्र, रांची के बाद।
स्थानीय बीमारियों पर शोध और मुफ्त जांच की सुविधा।
जागरण संवाददाता, दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका समेत पूरे संताल परगना के ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) और एनआईएचआर के सहयोग से दुमका के जरमुंडी में मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट की स्थापना करने की पहल तेज हो गई है।
रांची के नामकुम के बाद यह राज्य की दूसरी यूनिट होगी। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी देते हुए राज्य सरकार से जरमुंडी स्थित पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में 620 वर्गमीटर जमीन निशुल्क आवंटित करने का अनुरोध किया है।
इधर इस मामले में नए भवन के निर्माण होने तक काम तुरंत शुरू करने के लिए फिलहाल पुराने सीएचसी परिसर में ही तीन कमरा आवंटित किया गया है।
रिसर्च यूनिट के लिए एक मेडिकल साइंटिस्ट, दो लैब स्टाफ और दो फील्ड स्टाफ का पद स्वीकृत किया गया है। अधिकृत जानकारी के मुताबिक अगले दो महीने के भीतर रिसर्च यूनिट काम शुरू कर देगा।
इस यूनिट के चालू होने से जरमुंडी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय बीमारियों पर वैज्ञानिक शोध संभव हो सकेगा। साथ ही यह सेंटर एम्स देवघर से संबद्ध रहेगा और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मार्गदर्शन में काम करेगा।
यह है रिसर्च यूनिट का उद्देश्य
रिसर्च यूनिट मुख्य रूप से एक रिसर्च व डायग्नोस्टिक यूनिट के तौर काम करेगा जहां सीधा इलाज तो नहीं होगा लेकिन बीमारियों की सर्विलांस, स्पेशल स्क्रीनिंग और एडवांस्ड जांच की सुविधाएं सीधे मरीजों को मिलेंगी।
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इसके शुरू होने से डेंगू, कोविड, लेप्टोस्पायरोसिस और इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों की मुफ्त व त्वरित जांच स्थानीय स्तर पर ही संभव होगी। इसके अलावा शोध परियोजनाओं के तहत गांवों में स्क्रीनिंग कैंप, काउंसलिंग और गंभीर मरीजों को देवघर स्थित एम्स रेफर करने की सुविधा भी दी जाएगी।
दुमका को मिली प्राथमिकता
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की उप सचिव धरकत आर. लुइकांग की ओर से छह मई 2026 को राज्य के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को भेजे गए पत्र में इसकी पूरी पृष्ठभूमि बताई गई है।
पत्र के अनुसार अप्रैल 2026 में आईसीएमआर-एनआईएचआर भुवनेश्वर की टीम ने दुमका जिला प्रशासन के साथ मिलकर संयुक्त सर्वेक्षण किया था। इस दौरान जरमुंडी को इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे उपयुक्त माना गया।
इसके बाद से ही तैयारियों ने रफ्तार दी गई। अप्रैल 2026 में आईसीएमआर-आरएमआरसी भुवनेश्वर की टीम ने दुमका के सिविल सर्जन, जिला कार्यक्रम प्रबंधक और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के साथ बैठक कर जनसंख्या आधारित स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रूपरेखा तैयार की।
डॉ. तनवीर रहमान को इस परियोजना का नोडल अधिकारी बनाया गया है। इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्वास्थ्य सूचकांकों का आकलन कर जिला स्तर की स्वास्थ्य योजनाओं को साक्ष्य-आधारित बनाना है।
ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
दुर्लभ और गंभीर बीमारियों के नमूनों को अब बड़े शहरों की लैब में भेजने के बजाए यहीं टेस्ट किया जा सकेगा। स्थानीय स्तर पर सटीक जांच मिलने से समय पर इलाज संभव होगा। संताल परगना के अंतिम व्यक्ति तक अत्याधुनिक स्वास्थ्य शोध और तकनीकों का लाभ पहुंचेगा।
दुमका के जरमुंडी में रिसर्च यूनिट स्थापित करने के दिशा में आईसीएमआर-एनआईएचआर भुवनेश्वर की टीम तेजी से काम कर रही है। एम्स देवघर इस यूनिट को पूरा तकनीकी और चिकित्सीय सहयोग प्रदान करेगा।
प्रो. डॉ. नितिन एम.गंगाने, डायरेक्टर, एम्स देवघर
आईसीएमआर के निर्देश पर जगह चिह्नित कर रिपोर्ट भेज दी गई है। काम में देरी न हो, इसके लिए जरमुंडी में तत्काल तीन कमरों का भवन आवंटित कर दिया गया है। नया भवन के निर्माण होने तक अभी इसी भवन में तमाम कार्य किए जाएंगे।
डॉ. रामप्रसाद, सिविल सर्जन, दुमका
रिसर्च यूनिट की स्थापना को लेकर प्रक्रिया काफी तेजी से चल रही है। दो महीनों के भीतर इस यूनिट के पूरी तरह से क्रियाशील हो जाने की पूरी संभावना है। इसके लिए आवश्यक मेडिकल उपकरणों व अन्य जरूरी सामग्रियों की खरीद प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
डॉ. तनवीर रहमान, नोडल अधिकारी, एमआरएचआरयू (दुमका)