दुमका के पाताल शिवलिंग के दर्शन मात्र से धुल जाते हैं पाप, शिवगंगा के सूखने पर ही संभव
बासुकीनाथ के शिवगंगा कुंड में पाताल महादेव के दर्शन और जलाभिषेक बुधवार से शुरू हो गए हैं, शिवगंगा की व्यापक सफाई के बाद श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है ...और पढ़ें
-1781100665565_m.webp)
पाताल शिवलिंग का विहंगम दृश्य
HighLights
शिवगंगा की व्यापक सफाई के बाद पाताल महादेव के दर्शन शुरू।
पाताल महादेव के दर्शन से सभी पाप धुलते, मनोकामनाएं पूर्ण होतीं।
यह पवित्र शिवलिंग केवल शिवगंगा सूखने पर ही दिखता है।
रूपेश झा लाली, बासुकीनाथ (दुमका)। विश्व प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ स्थित ऐतिहासिक, पौराणिक शिवगंगा तट के बीचो- बीच स्थित कुंड में विराजमान पाताल महादेव का बुधवार से दर्शन पूजन व जलाभिषेक प्रारम्भ हो गया।
लंबे अरसे के बाद बासुकीनाथ के शिवगंगा की पूर्णतः जल निकासी व व्यापक साफ सफाई होने के उपरांत शिवगंगा के मध्य स्थित कुंड में विराजमान पाताल महादेव के दर्शन एवं पूजन को लेकर श्रद्धालुओं में भी काफी उत्सुकता देखी जा रही है।
बुधवार को बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने शिवगंगा की सफाई में भी श्रमदान किया। पाताल महादेव के दर्शन के साथ ही पाताल महादेव के कब दर्शन होंगे इसकी चर्चा पर भी विराम लग गया। बासुकीनाथ से बाहर रहने वाले जिन श्रद्धालुओं को शिवगंगा की सफाई की जानकारी मिली थी।
वह भी अपने स्थानीय पंडा-पुरोहित एवं अन्य माध्यमों से शिवगंगा के पाताल महादेव के दर्शन से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। स्थानीय पंडा-पुरोहित व श्रद्धालुओं की माने तो पाताल कुंड के दर्शन के साथ ही इसके दर्शन, जलाभिषेक एवं शृंगार पूजन का बुधवार से ही तांता लग गया है।

पाताल महादेव का इतिहास
विश्व प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ धाम के उत्तरी दिशा में स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक महत्व वाले शिवगंगा अपने गर्भ में कई पौराणिक कथा व ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं समेटे हुए हैं। उन्हीं में से एक है शिवगंगा के मध्य में स्थित कुंड में विराजमान पाताल शिवलिंग। पाताल शिवलिंग की महिमा निराली है। मान्यता है कि उसके दर्शन, पूजन मात्र से सभी जन्मों के पाप धूल जाते है व मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
खबरें और भी
बासुकीनाथ धाम स्थित शिवगंगा का इतिहास करीब 684 वर्ष पुराना है। इस पवित्र सरोवर के बीच स्थित एक कुंड में एक पवित्र शिवलिंग है। पिछले कई वर्ष पूर्व शिवगंगा की साफ-सफाई के दौरान कुंड मिला व तकरीबन पंद्रह-बीस फीट खुदाई पश्चात नीचे स्थित पाताल शिवलिंग के समीप सिंदुर, त्रिशूल व अन्य प्राचीन सामग्री सहित एक शिलापट्ट भी मिला। जिसमें शिवगंगा के स्थापना काल की तिथि 1342 ई. अंकित है।
शिवगंगा के जल की पूर्ण रूपेण निकासी के बाद निकलने वाले इस पाताल शिवलिंग के पूजन को भक्तों का तांता लगा रहता है। इस शिवलिंग का दर्शन सिर्फ शिवगंगा के साफ सफाई व जल पूरी तरह से सूखने के दौरान ही संभव है। लोग इस पवित्र शिवलिंग का दर्शन व पूजन करने को सदैव लालायित रहते हैं।
भक्त बताते हैं कि जब शिवगंगा की सफाई होती है तो वे इस पवित्र शिवलिंग का दर्शन करने जरूर आते हैं। वहीं इस पाताल शिवलिंग के प्रधान पुजारी अनिल पंडा, मंदिर के पुजारी सदाशिव पंडा, मनोज पंडा, योगेश पंडा सहित अन्य लोग भी इसकी महिमा विस्तार पूर्वक बताते हुए कहते है कि पाताल शिवलिंग के दर्शन होने पर नित्य दिवस संध्या के समय भक्तों के द्वारा विधि विधान पूर्वक शृंगार पूजन भी किया जाता है।
बासुकीनाथ मंदिर के उत्तरी दिशा में स्थित प्राचीन व ऐतिहासिक शिवगंगा के मध्य में विराजमान पाताल महादेव की महिमा निराली है। शिवगंगा की पूर्णरूपेण साफ-सफाई के पश्चात ही इनका दर्शन होता है। पाताल महादेव की कुंड में मौजूद एक शिलापट्ट भी मिला है। जिसमें शिवगंगा के स्थापना काल की तिथि 1342 ई. अंकित है। पाताल महादेव के दर्शन के उपरांत इनके पूजन व श्रृंगार के लिए भक्तों की भारी भीड़ जुटती है।
अनिल पंडा, पुजारी पाताल महादेव बासुकीनाथ