गढ़वा सदर अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में धांधली, 600 रुपये नहीं दिए तो 2 दिन तक नहीं मिला इलाज
गढ़वा सदर अस्पताल के डायलिसिस सेंटर पर एक गरीब मरीज से 600 रुपये मांगने और पैसे न देने पर दो दिन तक इलाज से वंचित रखने का आरोप लगा है। ...और पढ़ें

सदर अस्पताल परिसर में संचालित डायलिसिस सेंटर। (जागरण)
HighLights
गढ़वा डायलिसिस सेंटर पर अवैध वसूली का आरोप।
पैसे न देने पर मरीज को दो दिन इलाज नहीं मिला।
पीपीपी मोड केंद्र की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।
संवाद सहयोगी, गढ़वा। सदर अस्पताल परिसर में पीपीपी मोड में संचालित डायलिसिस सेंटर एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है।
सरकारी दावों और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं के ढिंढोरों के बीच एक गरीब मरीज को डायलिसिस कराने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ा।
पीड़ित मरीज ने डायलिसिस सेंटर के कर्मियों पर उपचार के एवज में 600 रुपये मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। पैसे देने से असमर्थता जताने पर मरीज को दो दिनों तक टहलाया गया और जीवनरक्षक उपचार से वंचित रखा गया।
दरअसल, डंडई थाना क्षेत्र के सोनेहारा गांव निवासी 55 वर्षीय पुत्र सुनील कुमार लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं और नियमित डायलिसिस पर निर्भर हैं।
पीड़ित मरीज के अनुसार उनका डायलिसिस कराने का निर्धारित दिन सोमवार था। सोमवार को जब वह अपने तय समय पर सदर अस्पताल स्थित डायलिसिस सेंटर पहुंचे, तो कर्मियों ने मशीन में तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर उन्हें वापस घर भेज दिया और अगले दिन आने की हिदायत दी।
अगले दिन यानी आज मंगलवार को जब मरीज उम्मीद लेकर दोबारा अस्पताल पहुंचा, तो वहां तैनात कर्मियों ने डायलिसिस शुरू करने से पहले सीधे तौर पर 600 रुपये की मांग कर दी।
जब पीड़ित ने सरकारी सेवा का हवाला देते हुए पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, तो कर्मियों का रवैया अड़ियल हो गया। सुबह से लेकर देर शाम तक मरीज को अलग-अलग बहानों से अस्पताल परिसर में ही बैठाए रखा गया, लेकिन उसका डायलिसिस नहीं किया गया।
गंभीर अवस्था में मरीज दिनभर अस्पताल के गलियारों में भटकता रहा और लोगों से मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली।
मरीज की जिंदगी से खिलवाड़
चिकित्सकों के अनुसार डायलिसिस जैसे अति-संवेदनशील और जीवनरक्षक उपचार में घंटों की देरी भी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में महज कुछ पैसों की खातिर दो दिन तक इलाज रोकना सीधे तौर पर मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसा है।
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इस घटना ने सदर अस्पताल परिसर में पीपीपी मोड में संचालित डायलिसिस सेंटर प्रबंधन की कार्यशैली और निजी एजेंसियों के भरोसे चल रही सरकारी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
लाचार मरीज और उसके बदहवास स्वजन ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी कर्मियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। इधर, इस संबंध में पूछे जाने पर डायलिसिस सेंटर के कर्मियों ने कुछ भी कहने से इनकार किया।
सदर अस्पताल परिसर स्थित पीपीपी मोड में डायलिसिस सेंटर में मरीज से अवैध रूप से रुपये मांगने तथा रुपये नहीं देने पर डायलिसिस नहीं किए जाने की सूचना मिली है। संबंधित मरीज से इस संबंध में लिखित आवेदन देने को कहा गया है। शिकायत सही पाए जाने पर दोषी के विरुद्ध कड़ी एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित मरीज का डायलिसिस बिना किसी बाधा के कराया जाए। किसी भी परिस्थिति में मरीजों से अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. माहेरू यमानी, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल, गढ़वा