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    गढ़वा निकाय चुनाव: दलों के दलदल से निकलकर चुनाव लड़ने को बेताब दिख रहे प्रत्याशी, पार्टियों में बिखराव का डर

    Updated: Sun, 01 Feb 2026 05:16 PM (IST)

    गढ़वा निकाय चुनाव (Garhwa Local Elections) में एक ही दल के कई प्रत्याशी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने को उत्सुक हैं, जिससे दलों के भीतर ही संघर्ष की संभ ...और पढ़ें

    झारखंड निकाय चुनाव। (जागरण)

    झारखंड निकाय चुनाव। (जागरण)

    HighLights

    1. एक ही दल के प्रत्याशी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने को तैयार।

    2. गढ़वा निकाय चुनाव में दलों के भीतर संघर्ष की संभावना।

    3. पार्टी के निर्णय के विरुद्ध नामांकन करने की तैयारी में उम्मीदवार।

    संदीप केसरी शौर्य, गढ़वा। निकाय चुनाव में अपना दमखम दिखाने के लिए लोगों में बेताबी देखने को मिल रही है। एक ही दल से कई प्रत्याशी चुनाव मैदान में आते दिख रहे हैं। जिससे अपनों के बीच ही लड़ाई की संभावना बढ़ गई है।

    पूरा सिनेरियो महाभारत के मैदान जैसा सजता दिख रहा है। एक तरफ काैरव तो दूसरी तरह पांडव। कौन किसके साथ होगा, कौन कौरव व कौन पांडव होगा यह भविष्य में तय होगा।

    मगर वर्तमान में चुनाव मैदान में उतरने के इच्छुक लोग दलों के दल दल से निकलते दिख रहे है। क्योंकि एक ही दल से कई प्रत्याशी चुनाव मैदान में है।

    ऐसे में यदि वह पार्टी के साथ जाते हैं तो वह चुनाव नहीं लड़ सकते तथा उन्हें अपनी पार्टी के समर्थित उम्मीदवार का समर्थन करना होगा। इसलिए वह स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में आने को तैयार है।

    विभिन्न दलों द्वारा पार्टी समर्थित उम्मीदवार की घोषणा किए जाने के बाद भी प्रत्याशियों द्वारा पार्टी के निर्णय के विरूद्ध स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की जा रही है। यहां तक उनके द्वारा नामांकन किए जाने की तिथि की भी घोषणा कर दी गई है। ऐसे में एक ही दल के लोग आमने सामने लड़ते दिखे तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।

    जाहिर है यह निकाय चुनाव गैर दलीय है। बावजूद विभिन्न राजनीतिक दल इस चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को बेताब है। मगर उन्हें यह नहीं मालूम कि उनके समर्थन मात्र से उनका कार्यकर्ता चुनाव मैदान से बाहर नहीं हो जाएगा।

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    भारी न पड़ जाए अनदेखी

    उन्होंने भी तो वर्षों से पार्टी के लिए काम किया है। ऐसे में उन्हें चुनाव के समय इनाम भी चाहिए। राजनीतिक दलों के लिए ऐसे कार्यकर्ताओं की अनदेखी कहीं भारी नहीं पड़ जाए। यह चुनाव कहीं पार्टी में बिखराव का बीज तो नहीं बो देगा। इसको लेकर मुख्य दलों में डर का माहौल देखने को मिला है तथा किसी प्रकार की बयानबाजी करने से हिचक रहे है।

    अभी तक गढ़वा नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए खरीदे गए नामांकन पत्रों की सूची पर गौर करें तो इनके नाम ही राजनीति दलों की सारी पोल पोट्टी खोलते दिख रहे हैं। तीन दिनों के अंदर अभी तक 14 लोगों ने नामांकन पत्र लिया है। जिसमें जितेंद्र सिन्हा एवं मो. मासूम रजा झामुमो से पूर्व विधायक के प्रतिनिधि रह चुके है।

    वहीं, कंचन जायसवाल भाजपा से जुड़ी हुई है। संध्या सोनी समाजसेवी दौलत सोनी की पत्नी है। जबकि याकूब इकबाल का रिश्ता विभिन्न दलों से रहा है। वहीं अलखनाथ पांडेय का नाता भारतीय जनता पार्टी से रहा है तथा वह पूर्व में स्वयं तथा उनकी पत्नी मीरा पांडेय निवर्तमान नप उपाध्यक्ष हैं।

    इसी प्रकार अनिता दत्त पूर्व नप अध्यक्ष रह चूकी है यह झामुमो से जुड़ी हुई है। विकास कुमार माली, सामाजिक संगठन से जुड़े है। वहीं, सुरेंद्र विश्वकर्मा भाजपा के हैं। संतोष कुमार केशरी निवर्तमान नप अध्यक्ष पिंकी केशरी के पति हैं तथा वर्तमान में झामुमो के साथ हैं।

    अनिल कुमार पांडेय ने भाजपा से समर्थन मांगा है। आशीष कुमार सोनी समाजसेवा से जुडे रहे हैं। वहीं, कंचन कुमार साहू पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर के स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि का कार्यभार संभाल चूके हैं तथा शुरू से ही झामुमो से जुडे रहे हैं।

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