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    गढवा में सुरक्षा बेअसर: CISF हटते ही चोरों का अड्डा बना SAIL परिसर, करोड़ों की संपत्ति पर मंडराया खतरा

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 01:09 PM (IST)

    सेल के भवनाथपुर स्थित कर्सर प्लांट और आवासीय परिसर में करोड़ों खर्च के बावजूद चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे यह अपराधियों का गढ़ बन रहा है। ...और पढ़ें

    सेल का आवासीय परिसर

    सेल का आवासीय परिसर

    HighLights

    1. करोड़ों खर्च के बावजूद सेल परिसर में चोरी जारी।

    2. सीआईएसएफ हटाकर होमगार्ड को सुरक्षा जिम्मेदारी सौंपी।

    3. प्रबंधन की उदासीनता से अपराधियों का गढ़ बना परिसर।

    संवाद सूत्र, भवनाथपुर( गढ़वा)। कभी औद्योगिक गतिविधियों और अनुशासित सुरक्षा व्यवस्था के लिए पहचाने जाने वाला सेल (सेल–बोकारो इस्पात संयंत्र) का भवनाथपुर स्थित कर्सर प्लांट और आवासीय परिसर अब चोरों का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है।

    सुरक्षा और रख-रखाव पर वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद चोरी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हैरत की बात यह है कि इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ दें तो सेल प्रबंधन द्वारा स्थानीय पुलिस में शिकायत करने से कतराने लगे है , जिससे चोरों का मनोबल और बढ़ता जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, चोरी किए गए लोहे और अन्य कीमती सामानों को स्थानीय कबाड़ी दुकानों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के विंधमगंज, माझीयान्व और श्री बंसीधर नगर तक खुलेआम बेचा जा रहा है।

    कर्सर प्लांट क्षेत्र में स्थित दर्जनों गोदाम, घाघरा स्टोर, सेल के आवासीय परिसर में मौजूद इलेक्ट्रिक कार्यालय, मेंटनेंस कार्यालय, माइंस हाई स्कूल, गेस्ट हाउस, पानी टंकी, हिलव्यू क्लब, कमिटी सेंटर हॉल सहित कई महत्वपूर्ण भवनों और आवासों को सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में ही ध्वस्त कर दिया गया। इसके बावजूद परिसर में अब भी करोड़ों रुपये मूल्य के कीमती सामान पड़े हुए हैं, जो किसी भी समय चोरी हो सकते हैं।

    चिंता की बात यह भी है कि लगभग चालीस वर्षों से सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही सीआईएसएफ को हटाकर अब होमगार्ड के भरोसे सुरक्षा व्यवस्था सौंप दी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि सीमित संसाधनों और प्रशिक्षण वाले होमगार्ड के सहारे सेल परिसर कितना सुरक्षित रह पाएगा।

    वर्तमान में सेल में मात्र तीन अधिकारी, पांच स्थायी कर्मचारी और करीब डेढ़ दर्जन संविदा कर्मी ही कार्यरत हैं, जो इतने बड़े परिसर की निगरानी के लिए नाकाफी माने जा रहे हैं।

    सेल परिसर में अभी भी सेल कर्मी, डीएवी स्कूल, शिशु विद्या मंदिर, बैंक, संवेदक और यूनियन से जुड़े लोग आवासों में रह रहे हैं, जबकि लगभग एक तिहाई आवासों पर अवैध कब्जाधारियों का डेरा है। इससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक जटिल हो गई है।

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    वहीं, वर्षों से सेल के आवासीय परिसर में रहकर व्यवसाय कर रहे दुकानदारों की स्थिति भी दयनीय हो चुकी है। चोरी, असुरक्षा और घटती आबादी के कारण कई पुरानी दुकानें बंद हो चुकी हैं और दुकानदार पलायन को मजबूर हैं। सेल की इस बदहाली का सीधा असर भवनाथपुर बाजार पर भी पड़ा है, जहां अब वीरानी छाई रहती है।

    कुल मिलाकर, सेल प्रबंधन की उदासीनता, कमजोर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक अनदेखी के कारण भवनाथपुर स्थित सेल परिसर तेजी से अपराधियों का गढ़ बनता जा रहा है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

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