15 साल पहले 'डेथ' घोषित हो चुका है गोड्डा का ये पुल, अभी तक हो रहा आवागमन; कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
गोड्डा के पोड़ैयाहाट स्थित गुड़मेश्वर धाम के पास 1950-55 में बना पुल अत्यंत जर्जर है और 15 साल पहले ही 'डेथ' घोषित हो चुका है। भारी वाहनों के आवागमन औ ...और पढ़ें

पोडै़याहाट का गुड़मेश्वर धाम का जर्जर पुल। फोटो जागरण
HighLights
पुल 1950-55 में बना, 15 साल पहले 'डेथ' घोषित।
भारी वाहनों के आवागमन से कभी भी ढहने का खतरा।
मरम्मत नहीं हुई, समानांतर पुल बनाने की जरूरत।
परमानंद मिश्र, पोड़ैयाहाट (गोड्डा)। प्रखंड मुख्यालय के निकट स्थित गुड़मेश्वर धाम के पास चीर नदी पर बना पुल अत्यंत जर्जर अवस्था में है। यह पुल बड़े हादसों का आमंत्रण दे रहा है, लेकिन आज तक संबंधित अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। आश्चर्य की बात यह है कि इस पुल को 15 वर्ष पूर्व ही 'डेथ' घोषित किया गया था।
इस पुल पर 20 टन से अधिक वजन वाली गाड़ी का चलना मना है, फिर भी भारी वाहनों का इस पर आवागमन जारी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि गुड़मेश्वर बाबा की कृपा से ही यह पुल अभी तक खड़ा है, अन्यथा इसकी जर्जर स्थिति में भारी वाहनों का चलना खतरे की घंटी है।
इस पुल का निर्माण 1950-55 के बीच किया गया था और तब से यह पुल कार्यरत है। समय के साथ इसकी स्थिति इतनी खराब हो गई कि जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। पुल के गडर और पिलर भी जर्जर हो चुके हैं।
25 वर्ष पूर्व पिलर के पास गड्ढा खोदकर ढलाई की गई थी, जिससे किसी तरह इसका बचाव किया गया। 15 वर्ष पूर्व इसे चलने लायक बनाया गया था, लेकिन इसके बाद से कोई मरम्मत नहीं हुई है।
हालांकि, राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के बाद इस पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही कुछ कम हुई है, फिर भी अभी भी यह समस्या बनी हुई है।
क्यों नहीं हो पाया काम?
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस पुल का मरम्मत नहीं किया गया या इसके समकक्ष कोई दूसरा पुल नहीं बनाया गया, तो जान-माल की हानि हो सकती है।
समाजसेवी अरविंद भगत ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व इस पुल के लिए दो बार टेंडर निकाला गया था, लेकिन किसी ने भी टेंडर नहीं भरा। इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे कि बाईपास का निर्माण महंगा होगा और झारखंड में किसी भी ठेकेदार के पास एक्सप्लोसिव का लाइसेंस नहीं है।
इसलिए इस पुल का एकमात्र विकल्प इसके समानांतर दूसरा पुल बनाना या उच्च स्तरीय टीम द्वारा सर्वेक्षण कर इसके रखरखाव का मूल्यांकन करना है।
यदि समय रहते इस पर कार्य नहीं किया गया, तो यह पुल कभी भी धाराशायी हो सकता है, जिससे बड़ी जान-माल की क्षति की आशंका है।
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