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    झारखंड-बिहार को जोड़ने वाला पुल हुआ जर्जर, अवैध बालू खनन से नींव हुई कमजोर; हादसे का खतरा

    Updated: Fri, 15 May 2026 02:48 PM (IST)

    झारखंड और बिहार को जोड़ने वाली गेरुआ नदी पर बने चार पुल अवैध बालू खनन के कारण जर्जर हो गए हैं। इससे कभी भी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है। ...और पढ़ें

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    विधु विनोद, गोड्डा। झारखंड और बिहार को जोड़ने वाली गेरुआ नदी में बने चार अहम पुलों की स्थिति बीते करीब एक दशक से जर्जर बनी हुई है। इस कारण जिले के काेरियाना, लतरामपुर, डुमरिया और हनवारा पुल पर कभी भी हादसे हो सकते हैं।

    भागलपुर में विक्रमशिला पुल के ध्वस्त होने के बाद अब पुलों को लेकर अधिक सतर्कता बरती जा रही है लेकिन विभागीय स्तर पर इसकी संवेदनशीलता नहीं दिख रही है। झारखंड-बिहार को जोड़ने वाले उक्त चार पुल की नींव खोखली हो गई है।

    गेरुआ नदी से बालू का अंधाधुंध दोहन बीते तीन दशक से किया जा रहा है। बालू माफियाओं ने नदी के स्वरूप को ही ध्वस्त कर दिया है। जबकि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने नदियों पर पुलों के निर्माण, सुरक्षा और उनके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं।

    एनजीटी ने पुल के आसपास बालू उठाव पर रोक लगाया है। निर्माण गतिविधियों के दौरान नदी के पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कानूनी कार्रवाई का भी प्रविधान किया गया है।

    बावजूद इसके एनजीटी के मानकों की धज्जियां उड़ाकर माफियाओं ने पुलों की नींव ही हिला रखी है। अब इससे यातायात संकट के गहराने का खतरा बन गया है।

    महागामा प्रखंड के खुर्द डुमरिया गांव में गेरूआ नदी पर वर्ष 2012 में उच्च स्तरीय पुल का निर्माण कराया गया था। निर्माण के बाद फिर कार्यएजेंसी ने कभी इसके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया। इन दिनों पुल काफी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। लोगों को इससे गुजरने में डर लगता है।

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    लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है और यह पुल कभी भी धाराशायी हो सकता है। इस पुल से प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहनों का परिचालन होता है, जिससे खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

    बावजूद इसके आरसीडी विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है। पुल के आसपास बालू का उठाव हो जाने से पुल की नींव खोखली हो गई है। कमोबेश यही स्थिति वर्ष 2009 में बने काेरियाना पुल, वर्ष 2010 में बने लतरामपुर पुल और वर्ष 2016 में बने हनवारा पुल की है। उक्त सभी पुल गेरुआ नदी पर बने हैं, वहां बालू के अवैध खनन के कारण पुलों की नींव कमजोर पड़ती जा रही हैं।

    उक्त सभी उच्चस्तरीय पुल गोड्डा जिला को बिहार के भागलपुर एवं बांका जिला से जोड़ते हैं। उक्त पुलों से होकर ही दोनों राज्यों के लोगों का आवागमन होता है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पुल के कई पिलर नीचे से कमजोर हो चुके हैं।

    नदी में लगातार हो रहे कटाव और अवैध बालू उठाव के कारण पुल कमजोर होते जा रहे हैं। कई जगह पिलर का सरिया बाहर दिखाई देने लगी है। वहीं पुल के ऊपरी हिस्से में भी दरारें देखने को मिल रही है।

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    पुलों की देखभाल निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें संरचनाओं को सुरक्षित और कार्यात्मक बनाए रखने के लिए निरीक्षण, सफाई और मरम्मत कार्य शामिल है। इंजीनियरों की ओर से पुल के फाउंडेशन, पीलर्स और डेक (ऊपरी सतह) का नियमित निरीक्षण किया जाता है ताकि किसी भी तरह की दरार, जंग या संरचनात्मक कमजोरी का पता चल सके। बसंतराय और हनवारा क्षेत्र के उच्च स्तरीय पुलों की जांच पड़ताल कराई जा रही है। इसे दुरुस्त करने के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी।

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    राज कुमार राजेश, कार्यपालक अभियंता, पीडब्ल्यूडी, गोड्डा।