झारखंड में 18 जून तक होगी मानसून की एंट्री, अल नीनो के कारण कम बारिश के आसार; खेती के लिए क्या है सलाह?
झारखंड में 18 जून तक मानसून आने की उम्मीद है, पर अल नीनो के प्रभाव से इस बार कम बारिश की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कम अवधि वाली और कम ...और पढ़ें

झारखंड का मौसम। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी, गोड्डा। जिले में शुरूआती जून से ही लोगों को भीषण गर्मी व उमस का अहसास हो रहा है। वहीं, मौसम विभाग ने जून तक वर्षा की संभावना नहीं जताई है।
जून के पहले चार दिन तापमान में बढ़ोतरी के साथ उमस बनी रहेगी। इसके बाद अगले 2 दिनों तक येलो अलर्ट की संभावना जताई है, जबकि झारखंड सहित जिला में 18 जून तक मानसून के प्रवेश की संभावना है।
इधर, भारतीय मौसम विभाग ने पहले से अब तक के Jharkhand Weather Forecast में मानसून के कमजोर रहने की संभावना जताई है।
इसके साथ ही कहा है कि मानसून सीजन में वर्षा कम होने के साथ ही कई मौके पर जून से लेकर सितंबर तक तापमान व गर्मी भी अधिक रहने की संभावना है। यही संभावना किसानों को चितिंत किये हुए है।
दूसरी ओर इस बार नौतपा भी अपने अनुसार नहीं रहा है। इससे भी मानसून के कमजोर रहने की संभावना को बल मिला है। नौतपा दो जून को खत्म हो रहा है। अमूमन इसमें हीट वेब व भीषण गर्मी व कड़ी धूप रहता था लेकिन इस बार नौतपा में ऐसा कुछ नहीं दिखा।
नौतपा में हीट वेब व कड़ी धूप रहने से मानसून बेहतर रहता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और नौतपा का समापन दो जून को होने जा रहा है।
पिछले दो तीन दिनों से जिला में एक बार फिर से भीषण गर्मी व उमस पड़ रही है जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से बेहाल है जहां लोगों को काफी परेशानी का सामना का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम के अनुसार खेती करें
कृषि सह मौसम वैज्ञानिक रजनीश प्रसाद ने कहा कि जो अबतक के मानसून के अपडेट है, मानसून कमजोर ही रह रहा है। इसके पीछे बड़ा कारण सुपर अलनीनो का सक्रिय रहना है।
उन्होंने कहा कि हालात के अनुसार, इस बार किसान प्रयास करें कि कम वर्षा वाले व कम समय में उपज देने वाले फसल की खेती खरीफ में करें। अपलैंड भूमि पर मोटा अनाज और मध्यम लैंड और लो लैंड भूमि पर कम समय में उपज हाेने वाली धान की फसल लगायें।
उन्होंने कहा कि बदलते हालात व जलवायु परिवर्तन को देखते हुए किसान भी अब मौसम आधारित खेती करें और जल संरक्षण पर ध्यान दें नहीं तो दिक्कत हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इस बार अलनीनों के प्रभाव से मानसून के कमजाेर रहने की संभावना बनी हुई है। वैसे भी जब-जब अलनीनों का प्रभाव ज्यादा रहा है मानसून कमजोर रहा है व इसका असर खरीफ की खेती पर भी पड़ा है। उन्होंने बताया कि अबतक अनुमान में 12 से 18 जून के बीच मानसून के प्रवेश की संभावना है।
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मई माह में सामान्य से अधिक वर्षा
जिले में इस वर्ष मई माह में सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है हालांकि इससे खरीफ की खेती को फायदा नहीं हुआ है जो फसल वर्तमान में है उसे फायदा हुआ है। विभाग ने मिली जानकारी के अनुसार मई माह सामान्य वर्षापात 64.8 मिमी है।
जहां मई माह में 108.3 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जो सामान्य से अधिक है इस वर्ष नौतपा में भी कई मौके पर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
मौसम व कृषि विभाग जून से लेकर सितंबर तक प्रत्येक दिन का वर्षापात को रिकॉर्ड अलग से करती है यह समय मानसून का रहता है। देखना होगा कि इन चार माह मेंं किस तरह का वर्षापात रहता है।
जिले में सबसे अधिक वर्षापात जुलाई व अगस्त माह का रहता है जहां इन दो माह में ढाई सौ मिलीमीटर से अधिक सामान्य वर्षापात माहवार है जबकि जून व सितंबर में भी डेढ सौ मिलीमीटर से अधिक सामान्य वर्षापात का रिकॉर्ड है।