गुमला जेल में गैंगस्टर की शराब पार्टी ने खोली थी व्यवस्था की पोल, 4 जेलकर्मी हुए थे सस्पेंड
जनवरी 2022 में गुमला जेल में गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की शराब पार्टी की तस्वीरें वायरल होने से जेल प्रशासन की पोल खुल गई थी। ...और पढ़ें

सुजीत सिन्हा। (फाइल फोटो)
HighLights
जनवरी 2022 में गुमला जेल में गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पार्टी।
वायरल तस्वीरों ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
चार जेलकर्मी निलंबित, गैंगस्टर को दुमका जेल स्थानांतरित किया गया।
संतोष कुमार, गुमला। जनवरी 2022 में गुमला मंडल कारा के भीतर कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की शराब पार्टी की तस्वीरें सामने आने के बाद पूरे झारखंड में जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
जेल के अंदर नए साल के जश्न की वायरल तस्वीरों ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी की पोल खोलकर रख दी थी। तस्वीरों में सुजीत सिन्हा अपने साथियों के साथ शराब, मांसाहारी भोजन, सिगरेट और नकदी की गड्डियों के बीच जश्न मनाता दिखाई दिया था।
सुजीत सिन्हा को नवंबर 2021 में धनबाद जेल से गुमला मंडल कारा स्थानांतरित किया गया था। कुछ ही सप्ताह बाद जेल के भीतर पार्टी की तस्वीरें वायरल हो गईं।
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब इस संबंध में दैनिक जागरण ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। खबर के बाद तत्कालीन उपायुक्त शिशिर कुमार सिन्हा ने तत्काल जांच के आदेश दिए।
तत्कालीन एसडीओ, डीएसपी समेत कई अधिकारियों ने जेल पहुंचकर कैदियों और जेलकर्मियों से पूछताछ की। वहीं, तत्कालीन जेल आईजी मनोज कुमार ने सहायक जेल आईजी के नेतृत्व में अलग से जांच टीम गठित कर पूरे मामले की पड़ताल कराई।
जेल के भीतर नियमों का उल्लंघन
जांच में जेल के भीतर नियमों के उल्लंघन और गंभीर लापरवाही के संकेत मिलने पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की। प्रभारी जेलर सहित चार जेलकर्मियों को निलंबित किया गया, जबकि जेल अधीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
इसके साथ ही सुजीत सिन्हा को गुमला जेल से हटाकर दुमका केंद्रीय कारा स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उसकी विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए।
इस पूरे प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि वायरल तस्वीरों में गैंगस्टर के साथ गुमला के दो सजायाफ्ता अपराधी दीपक कुमार और सूरज पंडित भी मौजूद थे।
दोनों शहर के चर्चित चिकित्सक डॉ. आरबी चौधरी हत्याकांड में दोषी करार दिए जा चुके थे और उन्हें आजीवन कारावास के साथ अर्थदंड की सजा मिली थी।
सामान्यतः सजा सुनाए जाने के बाद ऐसे दोषियों को रांची स्थित केंद्रीय कारा भेजा जाता है, लेकिन उनका गुमला जेल में बने रहना और गैंगस्टर के साथ खुलेआम पार्टी करना जेल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल छोड़ गया था।
यह मामला केवल जेल के भीतर अनुशासनहीनता का नहीं था, बल्कि इसने यह भी उजागर किया कि यदि जेल की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लग जाए तो अपराधी सलाखों के पीछे भी प्रभाव और रसूख का प्रदर्शन अपने तरीके से कर सकते हैं। यह घटना आज भी झारखंड की जेल व्यवस्था पर लगे सबसे बड़े दागों में गिनी जाती है।