बुखार से तपते रहे दो मासूम, अस्पताल की जगह कराया झाड़-फूंक; गुमला में एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत
गुमला के पालकोट प्रखंड में अंधविश्वास और समय पर इलाज न मिलने से एक ही परिवार के दो बच्चों की ...और पढ़ें

पालकोट में अंधविश्वास से दो बच्चों की मौत। जागरण
HighLights
पालकोट में अंधविश्वास से दो बच्चों की मौत।
समय पर चिकित्सकीय उपचार न मिलने से हुई घटना।
संवाद सूत्र, पालकोट (गुमला)। गुमला के पालकोट प्रखंड के मतिम टोली गांव में अंधविश्वास और समय पर समुचित चिकित्सकीय उपचार नहीं मिलने से एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।
मृतकों की पहचान मतिम टोली निवासी फ्रांसिस उरांव के पुत्र सचिन उरांव (14) और अनूप उरांव (8) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, दोनों बच्चों को पिछले कुछ दिनों से बुखार की शिकायत थी। परिजनों ने बच्चों को अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में ही इलाज कराने का प्रयास किया।
बताया जा रहा है कि बीमारी के दौरान दोनों बच्चों के लिए झाड़-फूंक भी कराई गई। इसी बीच शुक्रवार को दोनों की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। दोनों बच्चे आरसी मध्य विद्यालय में पढ़ते थे। सचिन कक्षा चार और अनूप कक्षा एक का छात्र था।
घटना की जानकारी मिलने के बाद विद्यालय परिवार और ग्रामीणों में भी शोक की लहर है। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों बच्चों को कई दिनों से बुखार था। यदि समय रहते उनकी चिकित्सकीय जांच कराकर उचित उपचार कराया जाता, तो संभवत: स्थिति गंभीर होने से बच सकती थी।
हालांकि, बच्चों की मौत के वास्तविक चिकित्सकीय कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी के उपचार को लेकर जागरूकता की कमी और झाड़-फूंक पर निर्भरता का मुद्दा फिर सामने ला दिया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से गांवों में नियमित जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है, ताकि लोग बीमारी की स्थिति में अंधविश्वास के बजाय समय पर अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय उपचार कराएं।
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