मां ने ही बेटी की बलि चढ़ाई, बेटे को बचाने के नाम पर जघन्य वारदात: हजारीबाग हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा
हजारीबाग में एक मां ने बेटे की सलामती के लिए अपनी 13 वर्षीय बेटी की बलि दे दी। अंधविश्वास और अवैध संबंध के चलते मां, उसके प्रेमी और एक भगतिन ने मिलकर ...और पढ़ें

देर रात प्रेस वार्ता कर पुलिस ने हत्याकांड का किया खुलासा। (फोटो: जागरण)
HighLights
मां ने बेटे की सलामती के लिए बेटी की बलि दी।
अंधविश्वास, अवैध संबंध और तंत्र-मंत्र हत्या का कारण।
मां, प्रेमी, भगतिन गिरफ्तार; POCSO एक्ट में कार्रवाई जारी।
विकास कुमार, हजारीबाग। विष्णुगढ़ के कुसुंभा गांव में 13 वर्षीय मासूम बच्ची की हत्या का खुलासा ऐसा है, जिसने पूरे जिले को झकझोर दिया है। जिस मां ने बेटी को जन्म दिया, उसी ने अपने बेटे की सलामती और पारिवारिक संकट दूर करने की चाह में बेटी की बलि दे दी।
देर रात पुलिस ने मीडिया के सामने वारदात का खुलासा किया। पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतका की मां रशेमी देवी ने गांव की कथित भगतिन शांति देवी और अपने प्रेमी भीम राम के साथ मिलकर यह पूरी साजिश रची।
25 मार्च की सुबह गांव के मिडिल स्कूल के पीछे बांस झाड़ी में बच्ची का शव मिलने के बाद पूरे इलाके में दुष्कर्म और निर्मम हत्या की आशंका से भारी आक्रोश फैल गया था। शव की स्थिति देखकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
लेकिन छह दिनों तक चली एसआईटी जांच ने घटना की भयावह सच्चाई सामने ला दी। संयुक्त प्रेस वार्ता में अंजनी झा, शशि प्रकाश सिंह और अंजनी अंजन ने बताया कि हत्या किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि परिवार के भीतर रची गई थी।
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इससे पहले डीजीपी तदाशा मिश्रा स्वयं हजारीबाग पहुंच कर मामले की समीक्षा कर चुकी थीं। भाजपा सहित पूरा विपक्ष इस मामले पर आंदोलनरत था। जांच में सामने आया कि रशेमी देवी अपने बेटे सुधीर कुमार सिंह की शारीरिक और मानसिक परेशानी को लेकर लंबे समय से चिंतित थी।
बेटे की तबीयत और पारिवारिक विवादों को लेकर वह पिछले एक वर्ष से गांव की कथित भगतिन शांति देवी के संपर्क में थी। भगतिन ने उसे विश्वास दिलाया कि परिवार की समस्याएं तभी दूर होंगी जब किसी कुंवारी लड़की की बलि दी जाएगी।
यहीं से मां के भीतर अंधविश्वास का ऐसा बीज पड़ा कि उसने अपनी ही बेटी को बलि के लिए चुन लिया। पुलिस के अनुसार भगतिन ने उसे यह भी समझाया कि उसकी छोटी बेटी पर देवी सवार है और उसी की बलि सबसे प्रभावी होगी।
जांच का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रशेमी देवी और भीम राम के बीच करीब दस वर्षों से चले आ रहे अवैध संबंध हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार पति विनोद सिंह के मुंबई में रहने के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं।
गांव में इसकी चर्चा पहले से थी। यही संबंध धीरे-धीरे हत्या की साजिश का हिस्सा बन गया। 24 मार्च की रात रामनवमी अष्टमी के अवसर पर रशेमी देवी अपने बच्चों के साथ मंगला जुलूस में शामिल हुई।
मुख्य आरोपी भीम राम हर साजिश में था साथ

रात लगभग साढ़े नौ बजे वह अपनी बेटी को लेकर भीम राम के साथ शांति देवी के घर पहुंची। वहां मनसा मंदिर में पूजा शुरू हुई। बच्ची के माथे पर सिंदूर लगाया गया, आंखों में काजल लगाया गया और इलायची प्रसाद के रूप में खिलाई गई।
इसके बाद तीनों बच्ची को गांव की बांसबाड़ी में ले गए, जहां पहले से सफेद प्लास्टिक बिछाया गया था। पुलिस के अनुसार भगतिन ने मंत्र पढ़ते हुए कहा कि देवता को कुंवारी लड़की का रक्त चाहिए।
हत्या के बाद भी जारी रही क्रूरता
इसी दौरान भीम राम ने बच्ची का गला दबाया और जब वह छटपटाने लगी तो मां ने उसके दोनों पैर पकड़ लिए। हत्या के बाद भी मासूम से क्रूरता जारी रही। पुलिस के अनुसार घटना को दुष्कर्म जैसा दिखाने के लिए बांस की कॉइलिंग स्टिक का इस्तेमाल किया गया।
बाद में पत्थर से सिर पर वार कर रक्त निकाला गया और उसी रक्त से कथित तांत्रिक अनुष्ठान किया गया। शव को बाद में स्कूल के पीछे फेंक दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। मौत का कारण दम घुटना बताया गया।
मामले में गिरफ्तार 45 वर्षीय भीम राम, 35 वर्षीय रशेमी देवी और 55 वर्षीय शांति देवी पर बीएनएस की धारा 103(1), 65(2) और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि अंधविश्वास, अवैध संबंध और मां के मातृत्व के पतन की ऐसी कहानी बन गई है, जिसने पूरे समाज को भीतर तक झकझोर दिया है।
भीम राम भाजपा का कार्यकर्ता बताया जाता है। हालांकि की भाजपा जिला कमेटी ने इससे इनकार किया है। झामुमो की ओर से आरोपी को भाजपा पंचायत प्रकोष्ठ से जुड़ा बताया जा रहा है।
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